Imran Khan Health Scare: सियासत और क्रिकेट से ऊपर उठकर दो महान भारतीय खिलाड़ियों सुनील गावस्कर तथा कपिल देव द्वारा कैदखाने में दिन गुजार रहे पूर्व पाकिस्तानी दिग्गज क्रिकेटर इमरान खान के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करना तारीफ के काबिल है. पाकिस्तान के क्रिकेट गौरव इमरान खान अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. तकरीबन ढाई साल पहले इमरान खान को पाकिस्तान की हुकूमत ने तोशाखाना (राजकीय उपहारों की खरीद-फरोख्त) मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद से विभिन्न मामले उनपर चल रहे हैं.
इस बीच शहबाज शरीफ दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गए लेकिन इमरान खान को राहत नहीं मिली. कैदखाने में इमरान का स्वास्थ्य लगातार गिरने की खबरें आ रही हैं. वे रावलपिंडी की अडियाला जेल में हैं और उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपनी दाहिनी आंख की लगभग 85 प्रतिशत दृष्टि खो दी है.
इमरान के गिरते स्वास्थ्य से चिंतित होकर भारत के पूर्व कप्तानों सुनील गावस्कर, कपिल देव तथा मो. अजहरुद्दीन समेत अन्य पूर्व दिग्गज क्रिकेटरों इंग्लैंड के माइकल ब्रेयरली, माइकल एथरटन, डेविड गावर, नासिर हुसैन, ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटर बेलिंडा क्लार्क के साथ ग्रेग चैपल, इयान चैपल, किम ह्यूज, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ एवं न्यूजीलैंड के जॉन राइट ने पाकिस्तानी हूकूमत को पत्र लिख इमरान के प्रति मानवीयता दिखाने की अपील की है. मैदान पर प्रतिस्पर्धा चाहे जितनी तीव्र हो मगर खिलाड़ी है तो उत्कट खेल भावना भी सीने में होनी चाहिए.
और इसी का द्योतक है कपिल देव और सुनील गावस्कर की इमरान के लिए अपील. भारत के खिलाफ पाकिस्तान कई साजिशों में शामिल रहा है. उसकी अमानवीय हरकतों की फेहरिस्त आजादी के बाद से शुरू होती है और इस बात की कोई गारंटी नहीं कि भविष्य में वह बाज आएगा, लेकिन करुणा-दया का भाव हमेशा सर्वोपरि है. सरहदों की बंदिशें करुणा-दया के आगे बौनी हैं.
गावस्कर-कपिल देव ने इसे साबित कर दिया है. मैदान पर इमरान खान के खिलाफ कपिल देव और सुनील गावस्कर की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने के लिए दुनिया दीवानी हो जाती थी. हार-जीत, प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है लेकिन इंसानियत सबसे ऊपर है. गावस्कर के लिए जो आदर इमरान के सीने में था वह दुनिया जानती है.
गावस्कर सन् 1986 में इंग्लैंड दौरे के बाद क्रिकेट को अलविदा कहने चले थे लेकिन लॉर्ड्स पर लंच के दौरान इमरान खान ने उनसे कहा, “आप अभी संन्यास नहीं ले सकते क्योंकि पाकिस्तान अगले साल (1987 में) भारत का दौरा करेगा. हम दोनों मैदान पर टकराएंगे और भारत को उसी की सरजमीं पर हराने की मेरी ख्वाहिश है.
आप अगर उस टीम का हिस्सा न हों तो मजा नहीं आएगा.” इमरान के इस चुनौतीनुमा आग्रह को गावस्कर ने भी मान लिया, संन्यास का फैसला उन्होंने टाला. इमरान की ख्वाहिश जिस टेस्ट में पूरी हुई उसी में गावस्कर ने संन्यास भी ले लिया. पाकिस्तानी हुक्मरानों की इमरान के प्रति संवेदनशीलता कितनी है और दुनियाभर में अपने जमाने के शानदार क्रिकेटरों की अपील का उनके पत्थरदिल सीनों पर कितना असर पड़ेगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन पाकिस्तान को लानत है जिसने अपने राष्ट्रनायक को विकट स्थिति में छोड़ दिया है.
राजनीतिक-कूटनीतिक अदावतें तो चलती रहती हैं, पक्ष-विपक्ष में टकराव स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी भी है लेकिन पाकिस्तान हमेशा तानाशाहों या फौजी प्रमुखों का गुलाम रहा है और आज उसकी बदतर हालत दुनिया देख रही है.