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सर्व स्पर्शी बहुआयामी संतुलित बजट 2026, राष्ट्रहित और विकसित भारत के दिशा में ठोस कदम

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 4, 2026 18:28 IST

2014 से पहले विकसित भारत का जो लक्ष्य असंभव सा लगता था वह संभव लगने लगा है। यही अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

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ठळक मुद्देदीर्घकालिक लक्ष्य है - 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना।आत्मनिर्भरता आदि ऐसे पैमाने हैं जो किसी देश की विकसित अवस्था को परिभाषित करते हैं।

नई दिल्लीः 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट एक वार्षिक कर्मकांड न होकर अंतर्निहित संदेशों को लिए हुए है। यह साधारण या सामान्य बजट तो बिल्कुल भी नहीं है, यद्यपि ऊपरी तौर पर देखने पर ऐसा मानने की भूल कुछ लोग कर सकते हैं। वास्तव में यह दीर्घकालीन लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में सरकार द्वारा समय-समय पर लिए गए अनेक कदमों में से एक अत्यंत ठोस कदम है। वह दीर्घकालिक लक्ष्य है - 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना।

विकसित देश किसे कहते हैं? वर्तमान प्रचलित मापदंडों के अनुसार प्रति व्यक्ति आय, सामान्य नागरिक का जीवन स्तर, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, बेरोजगारी दर, विदेशी व्यापार संतुलन, शिक्षा का स्तर, शोध की उन्मुखता और सुविधा, अधिकांश सेक्टरों में आत्मनिर्भरता आदि ऐसे पैमाने हैं जो किसी देश की विकसित अवस्था को परिभाषित करते हैं।

वैश्विक स्तर के इन पैमानों पर हमें खरा उतरना है।  बहुत पीछे हैं, ऐसा भी नहीं है। योजनाबद्ध व व्यवस्थित रूप से इस दिशा में कार्य प्रारंभ हो चुका है जिसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। यही कारण है कि 2014 से पहले विकसित भारत का जो लक्ष्य असंभव सा लगता था वह संभव लगने लगा है। यही अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

वर्तमान बजट को हमें इसी पृष्ठभूमि में देखना होगा। तभी आलोचकों को भी समझ आएगा कि विकसित भारत के लक्ष्य का रास्ता लुभावने बजट से नहीं बल्कि ठोस परिणामकारी वित्तीय अनुशासन, वित्तीय प्रबंधन और वित्तीय उपायों को प्रमाणिकता से लागू करने से होकर जाता है।

इस बजट में ये उपाय कौन से किए गए हैं? कुछ महत्वपूर्ण उपायों की चर्चा आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण है - राजकोषीय घाटा। इसे कम कर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.3% निर्धारित  किया गया है जो पिछले वर्ष 2025-26 के 4.4% से कम है। इससे भी पिछले वर्ष 2024-25 में यह घाटा 4.8% था।  राजकोषीय घाटे में निरंतर कमी लाने का लक्ष्य सरकारी आय की तुलना में सरकारी व्यय को कम करने की ओर इंगित करता है जो विकास की राह सुदृढ़ करता है।

दूसरा महत्वपूर्ण उपाय जो किया गया है वह है पूंजीगत खर्च (capital expenditure = capex) के लक्ष्य को 2026-27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए का प्रस्तावित करना। यह केवल पिछले वर्ष की तुलना में ही 11% अधिक नहीं है बल्कि पिछले 10 सालों में भी सबसे अधिक किया जाने वाला आवंटन है। यह भारत की GDP का 4.4% है जो इस दृष्टि से भी पिछले सभी सालों में सर्वाधिक प्रतिशत है।

इसके मायने क्या हैं? इसके मायने हैं - सड़क, रेल, रक्षा, पोर्ट, शहरी विकास आदि बुनियादी ढांचे में सरकार द्वारा खर्च करना। इससे देश के सभी सेक्टरों को और उसके कारण सभी आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। रोजगार के अनेकों नए अवसर पैदा होते हैं। एक प्रकार से उत्प्रेरक का काम करते हुए यह अर्थव्यवस्था में चेन रिएक्शन उत्पन्न करने का काम करेगा।

इसके लिए बजट में अनेक योजनाओं की घोषणाएं हैं। जैसे - 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर आदि। प्राइवेट डेवलपर्स के द्वारा इंफ्रा में निवेश के रिस्क को ध्यान में रखते हुए एक इंफ्रा रिस्क गारंटी फंड का भी प्रावधान है। कुल मिलाकर बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए सभी आवश्यक निवेश हो इसकी चिंता की गई है। इसके दीर्घकालीन सुखद परिणाम मिलेंगे।

अगला महत्वपूर्ण बिंदु है - तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना। सेमीकंडक्टर नई तकनीक का दिल है। इसके लिए हमें विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस बजट के द्वारा इस क्षेत्र के दुनिया के चार शीर्ष देशों में आने के प्रयास किये गये हैं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई है। 40 हजार करोड़ का आवंटन है। जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी और अधिक वित्तीय सहायता दी गई है।

अर्थव्यवस्थाओं के बदलते स्वरूपों में रेयर अर्थ की उपयोगिता सामान्यतः ध्यान में नहीं आती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्युवल एनर्जी आदि क्षेत्रों में इसका भरपूर उपयोग होता है। किंतु इसके लिए हमारी निर्भरता अभी विदेशी सप्लाई पर है। चार राज्यों - उड़ीसा, केरल,  आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, जो खनिजों से भरपूर हैं - में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने के लिए बजट में आवंटन किया गया है।

AI की चर्चा हर क्षेत्र में है। भविष्य में संपूर्ण अर्थव्यवस्था के संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है। इसी को बढ़ावा देने के लिए बजट में AI मिशन और नेशनल क्वांटम मिशन की घोषणा की गई है। भारत - विस्तार नामक मल्टीलिंगुअल AI टूल के माध्यम से AI सुविधा को आम जनता तक पहुंचाने की सोच रखी गई है।

AI तकनीक का लाभ किसानों, दिव्यांगों जैसे वर्ग तक भी पहुंचे, इसकी चिंता AI आधारित एग्री स्टॉक पोर्टल, 3D तकनीकों के द्वारा की गई है। इन सभी योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन हो, इसके लिए कुशल व प्रशिक्षित युवा शक्ति चाहिए। बजट में स्किल और कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए उच्च स्तरीय समिति 'एजुकेशन टू एंप्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज' के गठन का प्रस्ताव रखा गया है।

शिक्षा क्षेत्र का बजट भी अनेक वर्षों के इंतजार के बाद प्रभावी रूप से बढ़ाया गया है। यह कुल बजट का 2.6% है। शिक्षा मंत्रालय बजट आवंटन में सभी मंत्रालयों की सूची अनुसार छठे नंबर पर है जो अपने आप में एक अच्छा संकेत है। इस बजट का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू और भी है जिसकी चर्चा बजट विश्लेषणों में बहुत कम हुई है। वह है इसका कूटनीतिक पहलू।

हमारे संबंध अपने समर्थक और विरोधी देशों के साथ कैसे हों, यह देश की विदेश नीति तय करती है। किंतु इन देशों के साथ वर्तमान राजनीतिक संबंधों के आधार पर आर्थिक संबंधों को भी इस बजट के माध्यम से पुनर्निर्धारित और पुनर्परिभाषित किया गया है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि बजट को एक आर्थिक नीति या हथियार के रूप में प्रयोग किया गया है जो राष्ट्र हित में अत्यंत आवश्यक व महत्व का कदम है।

बांग्लादेश का भारत विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी रवैया भारत की अनेक चेतावनियों व सख्त वक्तव्यों के बावजूद जस का तस है। इस बजट में उसको दिया जाने वाला अनुदान 50% घटाकर 60 करोड रुपए कर दिया गया है। मालदीव भी भारत से सैन्य तैनाती को लेकर तनातनी करता रहता है। उसके अनुदान को भी 8% कम करके 500 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

इसी प्रकार म्यांमार की सहायता भी पिछले वर्ष की तुलना में 14% कम करके 300 करोड रुपए कर दी गई है। ईरान के चाबहार पोर्ट, जो कि वैश्विक राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भी है, की सहायता को बिल्कुल समाप्त कर दिया गया है। इसे ईरान और अमेरिका के साथ भारत के वर्तमान संबंधों के संदर्भ में भी विश्लेषित किया जा सकता है।

मित्र देशों में नेपाल का आवंटन 14% बढ़ाकर 800 करोड रुपए किया गया है जबकि श्रीलंका को 400 करोड रुपए आवंटित किए गए हैं जो पिछले वर्ष से एक तिहाई अधिक है। भारतीय आर्थिक अनुदान पाने वाले देशों में भूटान सर्वोपरि है जिसे 2289 करोड रुपए दिए जाएंगे। नेपाल और भूटान की सीमाएं चीन से मिलती हैं। इनको दिए गए अनुदानों को इस परिप्रेक्ष्य में समझना आवश्यक है।

अफगानिस्तान की भू-राजनैतिक स्थिति का आकलन करते हुए उसके अनुदान में कोई परिवर्तन न करते हुए 150 करोड रुपए ही आवंटित किए गए हैं। अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में बजट के माध्यम से राष्ट्रीय हित कैसे साधे जा सकते हैं, इसका एक अद्भुत उदाहरण वर्तमान बजट है।

कुल मिलाकर यह बजट टैक्स रेट, टैक्स स्लैब, प्रत्यक्ष कर, स्टैंडर्ड डिडक्शन आदि से परे हटकर सोचने को मजबूर करता है। यह बजट भविष्य के विकसित भारत की तैयारी की एक आहट लिए हुए है जिसे हम सुन सकें तो इसकी व्यापकता, दूरदर्शिता और संतुलित दृष्टिकोण के कायल हुए बिना नहीं रह पाएंगे।

प्रोफेसर रवींद्र गुप्ताप्राचार्य पीजीडीएवी कॉलेज (इवनिंग)दिल्ली विश्वविद्यालय

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