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कृषि क्षेत्र में एआई की चुनौतियां भी कम नहीं 

By ऋषभ मिश्रा | Updated: February 16, 2026 05:39 IST

बहुभाषी एआई टूल है जो एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सत्यापित कृषि पद्धतियों को एआई सिस्टम के साथ एकीकृत करेगा.

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ठळक मुद्देकिसानों को उनकी अपनी भाषा में सलाह, जिससे डिजिटल विभाजन कम होगा.वाॅयस और वीडियो के माध्यम से किसानों के सवालों का जवाब देगा. कई गंभीर चुनौतियां हैं,  जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र के लिए हाल ही में केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एक गेम चेंजर के रूप में पेश किया है. सवाल यह है कि क्या यह तकनीकी हस्तक्षेप वाकई देश के 14 करोड़ किसानों की तस्वीर बदल सकेगा? बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 7 फीसदी अधिक है. इसमें सबसे उल्लेखनीय है, भारत विस्तार प्लेटफार्म की स्थापना.

यह एक बहुभाषी एआई टूल है जो एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सत्यापित कृषि पद्धतियों को एआई सिस्टम के साथ एकीकृत करेगा. इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को कई सुविधाएं मिलेंगी जैसे कि मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु परिस्थितियों और फसल के आधार पर विशिष्ट सुझाव, सटीक और स्थानीय मौसम की जानकारी, जो सिंचाई और बुआई के फैसलों में मदद करेगी, फसलों में लगने वाली बीमारियों की शीघ्र पहचान और समाधान, फसलों के सही दाम और बाजार की मांग की जानकारी, किसानों को उनकी अपनी भाषा में सलाह, जिससे डिजिटल विभाजन कम होगा.

इसके अतिरिक्त बजट में ‘कृषि साथी’ नामक एआई चैटबॉट की भी घोषणा की गई है, जो वाॅयस और वीडियो के माध्यम से किसानों के सवालों का जवाब देगा. लेकिन एआई की सारी संभावनाओं के बावजूद, भारतीय कृषि क्षेत्र में इसके व्यापक कार्यान्वयन में कई गंभीर चुनौतियां हैं,  जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर छोटे और सीमांत किसानों में डिजिटल साक्षरता की गंभीर कमी है. जो किसान 85 फीसदी कृषक समुदाय का हिस्सा हैं, उनमें से अधिकांश स्मार्टफोन का बुनियादी उपयोग तो कर लेते हैं, लेकिन एआई आधारित जटिल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है.

एक औसत भारतीय किसान की उम्र 50 वर्ष से अधिक है और उनमें से कई अनपढ़ या अर्ध-साक्षर हैं. यदि भारत विस्तार जैसे प्लेटफॉर्म को सफल बनना है तो सिर्फ बहुभाषी इंटरफेस काफी नहीं है. किसानों को इन तकनीकों के उपयोग का व्यापक प्रशिक्षण देना होगा, जिसके लिए जमीनी स्तर पर कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में आवश्यकता होगी.

भारत के बहुत से गांवों में अभी भी मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट की सुविधा नहीं है और जहां है भी, वहां इसकी रफ्तार धीमी है. सरकार ने प्रधानमंत्री ‘वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क’ इंटरफेस (पीएम वाणी) और भारतनेट परियोजना के माध्यम से ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कार्यान्वयन अभी भी अपर्याप्त है.

टॅग्स :Farmersआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसArtificial intelligence
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