सुनील सोनी
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद होने जा रहा था, तब पहले गवर्नर जनरल होने जा रहे आखिरी वायसरॉय लॉर्ड लुई माउंटबेटन फिल्म कैमरामैन की एक टीम को निर्देश देने में जुटे थे कि स्वाधीनता की घोषणा के समारोह को कैसे फिल्माया जाना है. हालांकि, यह काम माउंटबेटन ने एलन कैंपबेल-जॉनसन को सौंपा था, जो उनके प्रेस अटैची बनने से पहले शाही नौसेना की विजय के कई मौकों की न्यूजरील बनवा चुके थे. लेकिन, परदे के पीछे सबकुछ वे ही तय कर रहे थे. माउंटबेटन ने एलन को यह जिम्मा इसलिए भी सौंपा था कि ब्रिटिश साम्राज्य के ‘अंत’ की न्यूजरील में कोई ठेस पहुंचाने वाले दृश्य न हों.
माउंटबेटन मार्च, 1947 में भारत पहुंचे और भारत-पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोहों के विवरण तय होते ही, जुलाई में ही उन्होंने गॉमोंट ब्रिटिश न्यूज के करामाती कैमरामैन जॉन ए. एस. टर्नर को बुलवा लिया. टर्नर को एक पूरी टीम चाहिए थी, तो उन्होंने ब्रिटिश मूवीटोन और ब्रिटिश पैरामाउंट न्यूज के चुनिंदा कैमरामैन को सत्ता हस्तांतरण को फिल्माने के लिए चुना.
इनमें भारतीय वेदप्रकाश भी थे. टर्नर पूरी तरह से माउंटबेटन के हुक्मबरदार थे और उनके निर्देश पर ही तिरंगे को लहराने का दृश्य तो फिल्माया, पर यूनियन जैक यानी ब्रिटिश साम्राज्य के ध्वज को नीचे उतारने का नहीं. यह वही टर्नर थे, जिन्होंने अकूत साहस दिखाते हुए बमबारी के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध में सिंगापुर में जापान और नॉरमंडी में हिटलर की फौजों के आत्मसमर्पण को भी फिल्माया था.
भारतीय स्वाधीनता दिवस समारोहों के 700 फुट के फुटेज के संपादन से बनी न्यूजरील को पैरामाउंट और यूनिवर्सल जैसे स्टूडियो ने भी खरीदा और दिखाया. हालांकि, टर्नर भारत में ठहरे रहे, आजादी के वक्त फैले सांप्रदायिक दंगों, महात्मा गांधी की हत्या और अंतिम यात्रा व अंत्येष्टि को भी फिल्माया. उन्होंने अपनी किताब ‘फिल्मिंग हिस्ट्री : द मेमाॅयर्स ऑफ जॉन टर्नर’ में इसका ब्यौरा दिया है,
जो लंदन वॉर म्यूजियम में संग्रहीत दस्तावेज हैं. माउंटबेटन को फिल्में बेहद पसंद थीं. इतनी कि वे उनका संग्रह भी करते और रॉयल नौसेना के युद्धपोतों में बने सिनेमाघरों के लिए उन्होंने सवाक फिल्में दिखाए जाने के लिए साउंड सिस्टम भी बनवाया. सिनेमा से लगाव ही था कि वे 1922 में एडविना के साथ हनीमून मनाने हॉलीवुड चले गए,
जहां चार्ली चैप्लिन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘नाइस एंड फ्रेंडली’ में दोनों ने मुख्य किरदार निभाए. चैप्लिन उनके जीवनभर मित्र रहे और तत्कालीन हॉलीवुड सितारा दंपति डगलस फेयरबैंक्स और मैरी पिकफोर्ड भी. माउंटबेटन कुछ फिल्मों में नायक भी बने और सिनेमा का संरक्षण भी किया. कोई और कारण नहीं कि ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवार्ड यानी ‘बाफ्टा’ उनके योगदान को याद करता है.
भले ही बाफ्टा को ‘ऑस्कर’ का अंदाजा देनेवाले अवार्ड के रूप में माना जाता है, पर है यह उससे शुद्ध और कला की बेहतर कसौटी. ‘आस्कर’ के करीब दो दशक बाद बाफ्टा बना ही इसलिए कि उसमें यूरोप समेत दुनिया के सिनेमा को कला के तौर पर परखा जाए. यह वही वक्त था, जब यूरोप में फिल्मों और टीवी को रंगमंच, ऑपरा तथा नृत्य जैसी मंचीय विधाओं के मुकाबले हीन समझा जाता था.
सोसाइटी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (सॉफ्टा) की बुनियाद नौ दिग्गज अंग्रेजी फिल्मकारों, पटकथा लेखकों, निर्माताओं और अभिनेताओं ने मिलकर ब्रिटिश फिल्म अकादमी के रूप में रखी थी. 1958 में ब्रिटिश फिल्म अकादमी और गिल्ड ऑफ टेलीविजन प्रोड्यूसर्स एंड डायरेक्टर्स का विलय हुआ और दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित चलचित्र कला पुरस्कारों के तौर पर स्थापित हो गया.
अप्रैल-मई के बीच होता रहा यह समारोह 2001 से फरवरी में होने लगा. माउंटबेटन 1966 से 1972 तक इसके अध्यक्ष बने और इसका स्वरूप बदलने के प्रयास करते रहे. लेकिन यह कामयाब तब हुआ, जब धुरा 1972 में राजकुमारी ऐनी ने संभाली. नाम ‘बाफ्टा’ किया गया और सर चार्ल्स चैपलिन को अमेरिकी शिल्पकार मित्शी कैनिफ के बनाए ‘कांस्य मुखौटे’ से पुरस्कृत किया.
राजकुमारी ऐनी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया और न्यूयॉर्क-लॉस एंजिल्स, स्कॉटलैंड तथा वेल्स में शाखाएं खोलीं. उन्हीं के सम्मान में बाफ्टा के मुख्यालय ‘पिकाडिली’ को इसी वजह से ‘द प्रिंसेस ऐनी थिएटर’ नाम दिया गया है. बाफ्टा में तकरीबन 8000 सदस्य हैं और इसमें अब फिल्मों के अलावा टीवी और गेम उद्योग के रचनात्मक कार्य कर रहे लोगों को भी सम्मानित किया जाता है.
‘जेम्स बॉन्ड’ फ्रेंचाइजी की ‘स्काईफॉल’ में मारी गईं ‘एम’ के रूप में दुनियाभर में मशहूर हुईं अदाकार जूडी डेंच ने 6 बाफ्टा जीते हैं, जबकि सर्वाधिक 15 बार नामांकन में मैरिल स्ट्रीप भी उनकी भागीदार हैं. मार्टिन स्कोर्सेसी सर्वाधिक 10 बार, जबकि वुडी एलन, जोएल कोएन, अल्फोंसो कुरॉन, एंग ली, लुई माले, एलन पार्कर और रोमन पोलान्स्की दो-दो बार निर्देशक के तौर पर नामांकित हुए हैं. इस बार बाफ्टा के नामांकन 27 जनवरी को यूट्यूब चैनल पर होंगे और 22 फरवरी को पुरस्कार वितरण होगा. बड़ी देर से, ‘ऑस्कर’ का यूट्यूब चैनल प्रसारण 2029 में आएगा.