वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की तारीख करीब है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के बेलगाम जुबान ही उनके लिए कई मुश्किलें पैदा करने जा रहे हैं. भारतीय मूल के वोटरों का मत भी ट्रंप की जेब से खिसकने लगा है. ...
थाई नौजवानों ने इस कदम के विरु द्ध जन-आंदोलन छेड़ दिया और अब वह इतना फैल गया है कि फौज की भी नाक में दम हो गया है. थाईलैंड की फौजी सरकार ने कई अखबारों और टीवी चैनलों का गला घोंट दिया है और दर्जनों नेताओं को जेल के सींखचों के पीछे डाल दिया है. ...
पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार को लेकर सवाल उठने लगे हैं. जिस तरह पुलिस और सेना के बीच टकराव हाल के दिन में पाकिस्तान में बढ़ हैं, वह इस देश के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. ...
वर्तमान सरकार ने नई शिक्षा नीति बनाई है. उसमें कुछ सराहनीय मुद्दे हैं लेकिन वे लागू कैसे होंगे? हमारे बच्चे भारतीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ेंगे लेकिन नौकरियां उन्हें अंग्रेजी के माध्यम से मिलेंगी. ऐसे में सिर्फ मजबूर लोग ही अपने बच्चों को बेकारी की खा ...
कोरोना की महामारी का उल्टा असर तो भारत को पीछे खिसका ही रहा है, भाजपा सरकार की नोटबंदी जैसी अन्य कई भूलें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. इसमें शक नहीं है कि पिछले छह वर्षो में भारत की अर्थव्यवस्था ने कई छलांगें भरी हैं और वह पड़ोसी देशों के मुकाबले काफी ...
भारत और पड़ोसी देशों के कई नरेशों, शाहों और बादशाहों से मेरे संपर्क रहे हैं, लेकिन जैसी सादगी, सज्जनता और आत्मीयता मैंने राजमाता में देखी, वह सचमुच दुर्लभ है. कई अन्य राज परिवारों की महिलाओं ने भी भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लेकिन ...
जरा याद करें, अब से लगभग पौने दो सौ साल पहले प्रथम अफगान-ब्रिटिश युद्ध में क्या हुआ था? 16 हजार की ब्रिटिश फौज में से हर जवान को पठानों ने कत्ल कर दिया था. सिर्फ डॉ. ब्राइडन अपनी जान बचाकर छिपते-छिपाते काबुल से पेशावर पहुंचा था. पठानों से भिड़कर पहले ...