वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
भारत में सत्तारूढ़ और विपक्षी नेता कितनी ही राजनीतिक तू-तू मैं-मैं करते रहें लेकिन कोरोना की महामारी से लड़ने में सब एक थे। भारत की जनता ने महामारी के दौरान अद्भुत अनुशासन का परिचय दिया है। वह अब भी सतर्क रहे, यह जरूरी है। ...
साल 2018 में जस्टिस श्रीकृष्ण कमेटी ने इस संबंध में जो रपट तैयार की थी, उसमें सरकार की इस निरंकुशता पर न्यायालय के अंकुश का प्रावधान था। लेकिन इस विधेयक में सरकार के अधिकारी ही न्यायाधीश की भूमिका निभाएंगे। ...
असलियत यह है कि पिछले 74 साल से शिक्षा के क्षेत्र में कोई मौलिक परिवर्तन नहीं हुए. इंदिरा गांधी के जमाने में शिक्षामंत्री त्रिगुण सेन और भागवत झा आजाद ने कुछ सराहनीय कदम जरूर उठाए थे. ...
किसान नेताओं को चाहिए कि वे इस सरकार का मार्गदर्शन करें और इसके साथ सहयोग करें ताकि भारत के किसानों को सदियों से चली आ रही उनकी दुर्दशा से मुक्त किया जा सके। ...
यदि कृषि-कानूनों के बारे में यह सावधानी बरती जाती तो सरकार को आज यह शीर्षासन नहीं करना पड़ता लेकिन यह शीर्षासन इस सरकार के भविष्य के लिए बहुत शुभ और सार्थक सिद्ध हो सकता है। ...
दुनिया के लगभग 200 देशों के लोग इस संयुक्त अरब अमीरात में काम करते हैं। इसमें सभी मजहबों, जातियों, रंगों और हैसियतों के लोग हैं लेकिन उनके बीच कभी हिंसा, दंगा, तनाव आदि की खबर नहीं आती। ...
प्रदूषण के इस दौर में विदेश में कई मित्रों से बात हुई। लंदन, लॉस एंजिल्स, फ्लोरिडा, बर्लिन और ज्यूरिख में प्रदूषण-अंक 50 के आसपास है। चीन जैसे देश के शहरों में 100 से कम है। ...