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लंदन की कोर्ट से विजय माल्या को लगा तगड़ा झटका, अब आसान नहीं होगा बचना  

By भाषा | Updated: May 8, 2018 23:01 IST

न्यायाधीश एंड्रयू हेनशा ने माल्या की आस्तियों को जब्त करने संबंधी वैश्विक आदेश को पलटने से इनकार कर दिया। अदालत ने भारतीय अदालत के उस आदेश को सही बताया है कि भारत के 13 बैंक माल्या से 1.55 अरब डॉलर की राशि वसूलने के पात्र हैं।

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लंदन, 8 मईः संकटग्रस्त उद्योगपति विजय माल्या को लंदन की एक अदालत में मंगलवार को उस समय झटका लगा जब 1.55 अरब डॉलर से अधिक की वसूली के मामले में उनकी याचिका खारिज हो गई। भारत के 13 बैंकों के समूह ने माल्या से 1.55 अरब डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) से अधिक की वसूली के लिए यहां एक मामला दर्ज कराया था। माल्या पर भारत में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी व मनी लांड्रिंग का आरोप है। 

न्यायाधीश एंड्रयू हेनशा ने माल्या की आस्तियों को जब्त करने संबंधी वैश्विक आदेश को पलटने से इनकार कर दिया। अदालत ने भारतीय अदालत के उस आदेश को सही बताया है कि भारत के 13 बैंक माल्या से 1.55 अरब डालर की राशि वसूलने के पात्र हैं। अदालत के फैसले से उक्त भारतीय बैंक इंग्लैंड व वेल्स में माल्या की आस्तियों की जब्ती के फैसले का कार्यान्वयन कर सकेंगे। 

वैश्विक जब्ती आदेश के चलते माल्या अपनी संपत्तियों को न तो बेच सकता है न ही किसी तरह का और सौदा कर सकता है। भारतीय बैंकों के इस समूह में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा,  कारपोरेशन बैंक,  फेडरल बैंक, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पीएनबी, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया शामिल है। 

इधर, दिल्ली की एक अदालत ने विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम (फेरा) के उल्लंघन से जुड़े धन शोधन के एक मामले में कारोबारी विजय माल्या की संपत्ति कुर्क करने के लिए आज नए निर्देश जारी किए। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से विशेष अभियोजक एन के माट्टा ने अदालत को बताया कि संपत्ति कुर्क करने वाले अधिकारियों की तरफ से निदेशालय को किसी तरह का जवाब नहीं मिला है, जिसके बाद मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शेरावत ने यह आदेश दिया। 

अदालत ने माट्टा की दलीलों को दर्ज किया और मामले की अगली सुनवाई पांच जुलाई को तय की है। अदालत ने 27 मार्च को बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त के माध्यम से संपत्ति कुर्क करने का निर्देश दिया था और आदेश के अनुपालन के संबंध में आज एक रिपोर्ट जमा कराने को कहा था। 

यह आदेश निदेशालय के एक आवेदन पर दिया गया था जिसमें उसने माल्या की संपत्ति कुर्क करने की इजाजत मांगी थी। अदालत ने बार-बार समन भेजने के बाद भी उसके समक्ष पेश नहीं होने पर चार जनवरी को माल्या को एक घोषित अपराधी माना था। अदालत ने पिछले साल 12 अप्रैल को इस शराब उद्योगपति के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी किया था जिसकी तामील की कोई तारीख तय नहीं है। 

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