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पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर लद्दाख के नेता करेंगे जन आंदोलन

By भाषा | Updated: November 13, 2021 20:45 IST

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करगिल, 13 नवंबर लद्दाख के प्रमुख नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर केंद्रशासित प्रदेश के मामलों और लोगों की चिंताओं के प्रति गंभीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए अपनी चार मुख्य मांगों को लेकर जन आंदोलन करने की शनिवार को घोषणा की।

इन मांगों में केंद्रशासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना और क्षेत्र के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपाय करना शामिल है।

छठी अनुसूची के लिए लेह स्थित ‘एपेक्स बॉडी ऑफ पीपल्स मूवमेंट’ (एबीपीएम) और ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (केडीए) के छह दिसंबर को आम हड़ताल करने का संयुक्त आह्वान किया है। इसके बाद दोनों संगठन ‘‘मौसम संबंधी परिस्थितियों में सुधार होने पर’’ मार्च में लेह और करगिल जिलों में जन रैली और जन संपर्क कार्यक्रम भी करेंगे।

एबीपीएम के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग और केडीए के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने क्षेत्र के दो शक्तिशाली संगठनों के बीच तीसरे दौर की वार्ता होने के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने अपनी मांगों के लिए अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। इन मांगों में लद्दाख में 10,000 से अधिक रिक्तियों को भरने के लिए स्थानीय युवाओं के लिए एक विशेष भर्ती अभियान चलाने के अलावा एक और लोकसभा सीट तथा दो राज्यसभा सीटों की मांग शामिल हैं।

‘एपेक्स बॉडी’ और केडीए का गठन पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद किया गया था। शुरू में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लद्दाख इकाई भी ‘एपेक्स बॉडी’ का हिस्सा थी, लेकिन लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग उठाए जाने के बाद पार्टी ने स्वयं को इस संगठन से अलग कर दिया था।

लेह के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे की अपनी पुरानी मांग को पूरा किए जाने का स्वागत किया और बाद में अपनी संस्कृति एवं पहचान की रक्षा के लिए संविधान की छठी अनुसूची के कार्यान्वयन की मांग के समर्थन में शीर्ष निकाय (एपेक्स बॉडी) का गठन किया, लेकिन केडीए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने के पक्ष में नहीं था और उसने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई। इन दोनों संगठनों ने अपनी-अपनी मांगों को पूरा करने का दबाव बनाने के लिए एक अगस्त को हाथ मिला लिया।

करबलाई ने कहा, ‘‘मिलकर तैयार किए गए हमारे चार बिंदुओं वाले एजेंडे के समर्थन में पूरा लद्दाख एकजुट है... भारत सरकार ने लद्दाख के लोगों की इच्छा एवं मांगों को पूरा करने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई है, इसलिए हमें हमारी रणनीति की समीक्षा करनी पड़ी और जन आंदोलन का फैसला करना पड़ा।’’

केडीए नेता ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा गठबंधन तोड़ने और जनता के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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