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एससीओ देश समावेशी राजनीतिक ढांचे के लिए अफगानिस्तान को प्रेरित करें :शी

By भाषा | Updated: September 17, 2021 22:40 IST

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बीजिंग, 17 सितंबर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने शुक्रवार को कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों को समन्वय बढ़ाना चाहिए और उदार नीतियां बनाने के लिए एक समावेशी राजनीतिक ढांचा तैयार करने को लेकर अफगानिस्तान को प्रेरित करना चाहिए। साथ ही, काबुल पर तालिबान के कब्जा करने के बाद आतंकवाद के सभी स्वरूपों से दृढ़ता से लड़ना चाहिए।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में एससीओ के 21वें शिखर सम्मेलन को वीडियो लिंक के जरिए संबोधित करते हुए शी ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान जबरदस्त बदलाव के दौर से गुजरा है। ’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो लिंक के जरिए शिखर सम्मेलन को संबोधित किया और विदेश मंत्री एस. जयशंकर आठ देशों के समूह की बैठक में शरीक हुए। एससीओ के सदस्य देशों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं।

शी ने अपने संबोधन में तालिबान का नाम लिये बगैर कहा, ‘‘विदेशी सैनिकों की वापसी ने इसके इतिहास में एक नया अध्याय खोल दिया, लेकिन अफगानिस्तान अब भी कई दुरूह चुनौतियों का सामना कर रहा है और उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासतौर पर हमारे क्षेत्र के देशों के सहयोग की जरूरत है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम एससीओ सदस्य देशों को समन्वय बढ़ाने, एससीओ-अफगानिस्तान संपर्क समूह जैसे मंचों का पूरा उपयोग करने और अफगानिस्तान में सुगमता से परिवर्तन लाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अफगानिस्तान को व्यापक आधार वाला एवं समावेशी राजनीतिक ढांचा अपनाने, उदार घरेलू एवं विदेश नीतियां अपनाने, आतंकवाद के सभी स्वरूपों से दृढ़ता से लड़ने तथा शांति, स्थिरता व विकास के पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।’’

तालिबान के काबुल पर मध्य अगस्त में कब्जा करने के पहले और बाद में उससे (तालिबान से) संपर्क कायम रखने वाले चीन ने युद्ध प्रभावित देश को खाद्य सहायता के लिए 3.1 करोड़ डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है।

शी ने यह भी कहा कि ‘‘एससीओ देशों को हमारी साझा सुरक्षा को कायम रखने की जरूरत है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्षेत्र में जटिल सुरक्षा परिदृश्य का सामना करने को लेकर हमें साझा, व्यापक, सहयोगी और सतत सुरक्षा की जरूरत होगी तथा आतंकवाद, अलगाववाद व चरमपंथ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। ’’

उन्होंने खासतौर पर उईगुर चरमपंथी संगठन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) का नाम लिया, जो अशांत शिंजियांग प्रांत में स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं, जहां अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों ने चीन पर उईगुर मुस्लिमों के मानवाधिकारों का हनन करने के आरोप लगाये हैं।

चीन ने तालिबान से ईटीआईएम को शिंजियांग में हमले नहीं करने देने को कहा है जिसकी सीमाएं अफगानिस्तान से लगी हुई हैं।

बाद में, एससीओ और सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के सदस्य देशों के नेताओं के संयुक्त सम्मेलन को वीडियो लिंक से संबोधित करते हुए शी ने अफगानिस्तान में क्रमिक परिवर्तन, अफगानिस्तान को वार्ता में शामिल करने और अफगान लोगों को मुश्किलों से निकलने में मदद करने की कोशिशें करने की अपील की।

उन्होंने एससीओ देशों से खुलेपन और एकीकरण को बढ़ावा देने की भी अपील की।

शी ने कहा कि उनका देश एक चीन-एससीओ बिजनेस ऐंड ट्रेड इंस्टीट्यूट स्थापित करेगा ताकि समूह के सदस्य देशों के बीच व्यापार सहयोग को बढ़ाया जा सके।

शी ने यह भी कहा, ‘‘हमें अपने-अपने देशों में चुनाव सहित अहम राजनीतिक एजेंडा क्रमिक रूप से आगे बढ़ाने में भी एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। हमें अपने क्षेत्र के देशों के घरेलू मामलों में किसी बाहरी हस्तक्षेप की इजाजत नहीं देनी चाहिए। ’’

उन्होंने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को राजनीतिक रंग देने के किसी भी कार्य का सख्त विरोध करते हुए कहा, ‘‘हमें वायरस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने, टीकों के निष्पक्ष एवं समतापूर्ण वितरण को बढ़ावा देने तथा कोविड-19 की उत्पत्ति को राजनीतिक रंग देने का सख्त विरेाध करने की जरूरत है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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