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चीन की सेना का मुकाबला करने के लिए अमेरिका करेगा सैनिकों की तैनाती: विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ

By निखिल वर्मा | Updated: June 26, 2020 05:41 IST

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि सैनिकों की तैनाती जमीनी स्थिति की वास्तविकता के आधार पर की जाएगी।

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ठळक मुद्देकोरोना वायरस महामारी के बीच चीन लगातार दूसरे देशों की सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है.अमेरिका, जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या करीब 52 हजार से घटा कर 25 हजार कर रहा है। चीन की धमकी के बारे में बताते हुए उन्होंने भारत के साथ खूनी टकराव और बीजिंग की दक्षिण चीन सागर में गतिविधियों का हवाला दिया।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, और फिलीपीन जैसे एशियाई देशों को चीन से बढ़ते खतरे के मद्देनजर अमेरिका दुनिया भर में अपने सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर रहा है। साथ ही अमेरिकी सैनिकों इस तरह से तैनात कर रहा है कि वे जरुरत पड़ने पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीन की सेना) का मुकाबला कर सकें। पोम्पिओ ने जर्मन मार्शल फंड के वर्चुअल ब्रसेल्स फोरम 2020 में एक सवाल के जवाब में यह कहा।

पोम्पिओ ने कहा, ‘‘हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारी तैनाती ऐसी हो कि पीएलए का मुकाबला किया जा सके। हमें लगता है कि यह हमारे समय की यह चुनौती है और हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारे पास उससे निपटने के लिए सभी संसाधन उचित जगह पर उपलब्ध हों।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर सैनिकों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है और इसी योजना के तहत अमेरिका, जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या करीब 52 हजार से घटा कर 25 हजार कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ जगहों पर अमेरिकी संसाधन कम रहेंगे। कुछ अन्य जगह भी होंगे... मैंने अभी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से खतरे की बात कही है, इसलिए अब भारत को खतरा, वियतनाम को खतरा, मलेशिया, इंडोनेशिया को खतरा, दक्षिण चीन सागर की चुनौतियां हैं।’’ 

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक यूरोप में नहीं थे, तो यह इसलिए था क्योंकि उन्हें अन्य स्थानों का सामना करने के लिए ले जाया जा रहा था। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का भारत के अलावा अन्य देश जैसे वियतनाम. इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और दक्षिण चीन सागर में तनाव चल रहा है। अमेरिकी सेना "हमारे समय की चुनौतियों" को पूरा करने के लिए "उचित रूप से तैनात" है।

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