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पाकिस्तान की अजब कहानी! सिंध में 11 हजार स्कूल ऐसे जहां शिक्षक हैं पर कोई छात्र नहीं

By विनीत कुमार | Updated: March 4, 2022 14:54 IST

पाकिस्तान के सिंध में 11 हजार के करीब ऐसे स्कूल हैं जहां कोई छात्र नहीं है जबकि शिक्षकों की सैलरी बनती है। यहां नियुक्त शिक्षक बिना किसी काम के सैलरी उठाते हैं। पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ये खबर आई है।

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ठळक मुद्देपाकिस्तान के सिंध प्रांत में 11 हजार स्कूलों में शिक्षक हैं पर कोई पढ़ने वाला नहीं।समाज के प्रभावशाली लोग इन स्कूलों को अपने गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है, पीने के पानी, शौचालय, खेल का मैदान आदि की कमी।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कम से कम 11,000 स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक को हैं लेकिन कोई छात्र नहीं है। पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इन स्कूलों में शिक्षक काम कर रहे हैं और बिना कोई काम किए उचित वेतन भी प्राप्त कर रहे हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार पाकिस्तान के 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि ये स्कूल राज्य के सीमित संसाधनों पर बोझ साबित हो रहे हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों को भुगतान के कारण 11,000 शिक्षकों के वेतन का भारी बिल बना रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावशाली लोग इन स्कूलों को अपने गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि इन स्कूलों में कोई छात्र पढ़ाई के लिए नहीं आता है।

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण सिंध में प्रति 1,000 छात्रों पर 1.8 स्कूल हैं। इसमें से मात्र 15 प्रतिशत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में दो शिक्षक हैं। इतना ही नहीं स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। बड़ी संख्या में स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय, खेल का मैदान और चारदीवारी जैसी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को प्रांत में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है- विशेष रूप से माध्यमिक विद्यालयों की संख्या, जिनकी संख्या केवल 2000 से कुछ अधिक है। इसके मुकाबले प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 49000 है।

इस बीच आलोचकों ने सिंध सरकार से सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए अच्छे शिक्षकों को बेहतर वेतन देने और सभी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिए कहा है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के विकसित देशों की तरह अगर स्कूलों में हाई-टेक सुविधाएं न सही तो कम से कम बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।

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