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नोबेल पुरस्कार : हर बार सही होने के कारण भौतिकी पुरस्कार के हकदार थे जलवायु प्रतिरूप तैयार करने वाले

By भाषा | Updated: October 6, 2021 14:04 IST

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(डॉ पुष्प राज तिवारी, यूनिवर्सिटी ऑफ हर्टफोर्डशायर)

हर्टफोर्डसायर (ब्रिटेन), छह अक्टूबर (द कन्वरसेशन) भौतिकी में इस साल का नोबेल पुरस्कार स्यूकुरो मनाबे, क्लॉस हैसलमान और जियोर्जियो पारिसी के बीच साझा किया गया है। पेरिस, जहां एक सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं वहीं अन्य दो जलवायु संबंधित प्रतिरूप तैयार करने वाले (मॉडलर) हैं जिनके काम ने हमारी समझ की नींव रखी है कि कार्बन डाइऑक्साइड जलवायु को कैसे प्रभावित करेगा।

इस पुरस्कार का और अधिक सही समय नहीं हो सकता था क्योंकि अत्याधुनिक जलवायु प्रतिरूपों पर आधारित आईपीसीसी की हालिया रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मनुष्य पहले से ही दुनिया भर के हर क्षेत्र में मौसम और जलवायु संबंधित कई चरम स्थितियों को प्रभावित कर रहे हैं।

जलवायु मॉडल एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जिसे पृथ्वी की जलवायु के व्यवहार को समझने और भविष्यवाणी करने के लिए उसकी नकल करते हुए डिज़ाइन किया गया है।

जलवायु मॉडल बड़े पैमाने पर गणितीय समीकरणों के वर्गों पर आधारित होते हैं जो उन भौतिक कानूनों की व्याख्या करते हैं जो वातावरण और महासागर के व्यवहार तथा पृथ्वी की जलवायु प्रणाली के अन्य भागों जैसे भूमि की सतह या बर्फ की चादरों के साथ उनके परस्पर संबंधों को नियंत्रित करते हैं।

1960 के दशक में, मनाबे ने यह समझने के लिए कुछ शुरुआती जलवायु प्रतिरूप प्रयोग किए कि कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस प्रभाव का कारण कैसे बन सकता है। 1967 के एक महत्वपूर्ण पत्र में, उन्होंने अपने सहयोगी रिचर्ड वेदरल्ड के साथ दिखाया कि कैसे कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने से पृथ्वी की सतह पर तापमान में वृद्धि होगी।

अनुसंधान लेखकों ने पृथ्वी के वायुमंडल को एक साधारण एक-आयामी स्तंभ के रूप में माना, और दिखाया कि यदि कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर दुगुना हो जाता है, तो वैश्विक तापमान में लगभग 2.3 की वृद्धि होगी? - यह एक ऐसी खोज है जो उल्लेखनीय रूप से आईपीसीसी रिपोर्ट में उपयोग किए गए उच्च-शक्ति वाले कंप्यूटर मॉडल द्वारा पांच दशक बाद दिए गए उत्तरों के समान है। कोई आश्चर्य नहीं कि वैज्ञानिकों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि यह जलवायु परिवर्तन पर अब तक का सबसे प्रभावशाली पत्र था।

1980 के दशक में हासेलमैन द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि कैसे, मौसम की अल्पकालिक परिवर्तनशीलता के बावजूद, भविष्य में दशकों के रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जलवायु मॉडल का उपयोग किया जा सकता है। 1980 के दशक में हम इन लंबी अवधि के रुझानों के बारे में बहुत कम जानते थे, लेकिन अब, हासेलमैन और मानेबे के काम की बदौलत, हम उदाहरण के लिए कह सकते हैं कि 2030 के दशक में अधिक गर्म हवाएं, बाढ़ और अन्य जलवायु चरम स्थितियां दिखने की संभावना है।

स्वयं एक जलवायु मॉडलर होने के नाते, मुझे पता है कि उनके काम ने मानव जाति के लिए महत्त्वपूर्ण लाभों में योगदान दिया है, क्योंकि यह पृथ्वी की जलवायु के बारे में हमारे ज्ञान के लिए ठोस भौतिक आधार प्रदान करता है। हम अब यह नहीं कह सकते कि हमें नहीं पता था - जलवायु मॉडल स्पष्ट हैं और बार-बार सही साबित हुए हैं।

क्या पृथ्वी गर्म हो रही है (हाँ)? क्या वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ी हुई मात्रा इसका कारण है (हाँ)? क्या इसे केवल प्राकृतिक कारकों द्वारा समझाया जा सकता है (नहीं)? क्या बढ़ते तापमान की वजह इंसानों द्वारा किया जा रहा उत्सर्जन है (हां) ? इन सभी और अन्य सवालों के जवाब इन अत्याधुनिक जलवायु मॉडल द्वारा दिए गए हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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