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ईरान में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर लोगों में उत्साह की कमी

By भाषा | Updated: June 14, 2021 20:38 IST

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तेहरान, 14 जून (एपी) ईरान में इस सप्ताह होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर वहां के नागरिकों में कोई खास दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रही है। कई लोग चुनाव का बहिष्कार करने की बात भी कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि मतदान करने से यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आ जाएगी कि देश के विकास एवं भविष्य को लेकर लिए जाने वाले फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

ईरान के विपक्षी दल मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी को हटाने की कवायद में जुटे हुए हैं। रूहानी देश के उज्ज्वल आर्थिक भविष्य का वादा कर सत्ता में आए थे, लेकिन 2015 में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ किए गए ईरान परमाणु समझौते के सफल नहीं होने के कारण लोगों में रूहानी के प्रति काफी रोष है।

ईरान के लोगों में रूहानी के प्रशासन के प्रति निराशा एवं रोष के कारण चुनाव में इस बार कट्टरपंथियों की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान की ओर से ऐतिहासिक परमाणु समझौते को पुन: पटरी पर लाने की कोशिशों के बावजूद रूहानी की स्थिति कमजोर बनी हुई है।

ईरान की लिपिकीय मूल्यांकन समिति ने शुक्रवार को होने वाले मतदान के लिए केवल सात उम्मीदवारों को मंजूरी प्रदान की है। समिति ने राष्ट्रपति हसन रूहानी के प्रमुख सहयोगियों और सुधारवादियों को चुनाव से बाहर कर दिया है। इस बार के चुनाव में देश के कट्टरपंथी विचारों वाली न्यायपालिका के प्रमुख इब्राहिम रायसी की राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। रायसी को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का काफी नजदीकी माना जाता है। ईरान इस समय कोविड-19 महामारी, वैश्विक अलगाव, व्यापक अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, इसलिए चुनाव को लेकर मतदाताओं के बीच उदासीनता दिखाई दे रही है।

ईरान में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एपी ने कुछ लोगों से बात की, जिनमें से कुछ का मानना है कि चुनाव होने से देश समस्याओं से बाहर निकल सकता है। कुछ लोगों ने कहा कि वे रायसी के पक्ष में मतदान करेंगे क्योंकि उन्हें लगता है कि वह देश को भ्रष्टाचार के चंगुल से निकाल सकते हैं। रायसी देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का प्रमुख चेहरा हैं। कुछ लोगों ने मतदान का बहिष्कार करने की भी बात कही है, क्योंकि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है कि वह उनके जीवन में बदलाव ला सकती है।

30 वर्षीय मासूमे इफ्तेखारीक ने कहा, “ मैंने राष्ट्रपति चुनाव को लेकर होने वाली बहसों और चर्चाओं को देखा है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि किसी उम्मीदवार के पास देश की समस्याओं का वास्तविक समाधान है।” छह महीने की गर्भवती मासूमे ने बढ़ती हुई महंगाई को लेकर निराशा जताते हुए कहा, “ यह परेशान करने वाली महंगाई है, इसलिए मेरा कोई पसंदीदा उम्मीदवार नहीं है।”

29 वर्षीय एकाउंटेंट फातिमा रेकाबी ने देश के मौजूदा आर्थिक हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “ मुझे किसी उम्मीदवार पर भरोसा नहीं है, क्योंकि मैं नहीं जानती कि आगे क्या होने वाला है। यदि स्थिति और खराब होती है तो लोग कैसे अपनी जिंदगी चलाएंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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