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लीबिया में परिवर्ती कार्यकारी प्राधिकरण के गठन की दिशा में हुई प्रगति का भारत ने किया स्वागत

By भाषा | Updated: February 6, 2021 17:37 IST

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(योशिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, छह फरवरी भारत ने तेल समृद्ध लीबिया में परिवर्ती कार्यकारी प्राधिकरण के गठन की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया है और आशा व्यक्त की है कि सभी पक्ष ‘लीबियन पॉलिटिकल डायलॉग फोरम’ (एलपीडीएफ) के प्रारूप के क्रियान्वयन एवं चुनाव कराने की दिशा में सकारात्मक रूप से काम करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं सुरक्षा परिषद लीबिया प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष टी एस तिरुमूर्ति ने कहा कि समिति परिषद का ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण’’ सहायक निकाय है जो लीबिया पर दोतरफा हथियार पाबंदी, संपत्तियों पर रोक, यात्रा पाबंदी, पेट्रोलियम के अवैध निर्यात पर रोक के उपायों समेत प्रतिबंध व्यवस्था को लागू करती है।

उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट किया,‘‘ मैं लीबिया में परिवर्ती कार्यकारी प्राधिकरण के गठन की दिशा में आज हुई प्रगति का स्वागत करता हूं। मैं आशा करता हूं कि सभी पक्ष ‘लीबियन पॉलिटिकल डायलॉग फोरम’ (एलपीडीएफ) के प्रारूप के क्रियान्वयन एवं चुनाव कराने की दिशा में सकारात्मक रूप से काम करेंगे।’’

तिरुमूर्ति ने पिछले ही महीने इस समिति के अध्यक्ष का पदभार संभाला था। भारत 31 दिसंबर, 2021 तक इस समिति का अध्यक्ष रहेगा जिसे 1970 प्रतिबंध समिति भी कहा जाता है।

उन्होंने कहा था कि भारत ऐसे समय इस समिति की अध्यक्षता संभाल रहा है ‘‘जब लीबिया एवं शांति प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान है।’’

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले 74 सदस्यीय ‘लीबियन पॉलिटिकल डायलॉग फोरम’ ने अपनी नई कार्यकारी परिषद के लिए एक अंतरिम प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति का चयन किया है जिसे संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि ने युद्ध प्रभावित देश के एकीकरण एवं दिसंबर में राष्ट्रीय चुनाव की दिशा में दूसरा ‘ऐतहासिक क्षण’ बताया।

मोहम्मद यूनुस मेनिफ प्रेसिडेंसी काउंसिल के राष्ट्रपति चयनित किए गए हैं जबकि अब्दुल हामिद मोहम्मद दबीबाह प्रधानमंत्री चुने गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने फोरम के सदस्यों द्वारा एक एकीकृत अस्थायी कार्यकारी प्राधिकार का चयन किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने सभी पक्षों से चुनाव नतीजे का सम्मान करने का आह्वान किया।

वर्ष 2011 में शासक मुअम्मर कज्जाफी के शासन के पतन के बाद लीबिया कई मोर्चों पर संकटों में घिर गया और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यताप्रात ‘गवर्नमेंट ऑफ नेशनल एकॉर्ड’ तथा ‘लीबियन नेशनल आर्मी’ के कमांडर जनरल हाफटर के बीच बंट गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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