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वैश्विक शांति के लिए अनिवार्य है भारत की भूमिका

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 7, 2023 12:36 IST

ईरानी राजदूत का कहना है कि भारत के हस्तक्षेप से गाजा समस्या का शीघ्र समाधान हो जाएगा और पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित हो जाएगी। इराज इलाही का कहना है कि ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण नेता के रूप में भारत को निश्चित रूप से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका युद्ध को रोकने में निभानी चाहिए। 

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ठळक मुद्देईरान के राजदूत इराज इलाही ने कहा है कि गाजा में जारी क्रूरता को भारत रोक सकताइसके कारण मानवीय आधार पर समस्या का स्थाई समाधान हो सकता हैईरानी राजदूत का कहना है कि भारत के हस्तक्षेप से गाजा समस्या का शीघ्र समाधान हो जाएगा

डॉ सुशील पांडेय: भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने कहा है कि गाजा में जारी क्रूरता को भारत रोक सकता है, जिससे मानवीय आधार पर समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है। ईरानी राजदूत का कहना है कि भारत के हस्तक्षेप से गाजा समस्या का शीघ्र समाधान हो जाएगा और पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित हो जाएगी। इराज इलाही का कहना है कि ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण नेता के रूप में भारत को निश्चित रूप से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका युद्ध को रोकने में निभानी चाहिए। 

इलाही का कहना है कि भारत के पास नैतिक साहस को कायम रखने और मानवता को बरकरार रखने का एक लंबा इतिहास है। ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश का इस संबंध में बयान भारत की भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण है और इससे यह स्पष्ट है कि आज ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में किस प्रकार भारत को देखा जा रहा है। 

हाल ही में सऊदी अरब के प्रिंस और पूर्व खुफिया प्रमुख तुर्की अल फैसल ने भी गांधीवादी संघर्ष समाधान की पद्धति के आधार पर भारत के सविनय अवज्ञा जैसे आंदोलन का उदाहरण दिया और कहा कि भारतीय संघर्ष समाधान की पद्धति मानवीय संवेदना पर आधारित है, भारत के हस्तक्षेप से ही शांति स्थापित हो सकती है। रूस, यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए भी भारत से इसी प्रकार का आग्रह पहले किया जा चुका है।

आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका लगातार प्रभावशाली होती जा रही है, इसके पीछे भारत में लोकतंत्र का समृद्ध इतिहास और संघर्ष समाधान के लिए शांतिपूर्ण नीतियों पर आधारित भारत की समृद्ध परंपरा है। आज संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं के निष्क्रिय होने के कारण कई क्षेत्रों में निरंतर संघर्ष की स्थितियां पैदा हो रही हैं। 

शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद एकध्रुवीय विश्व की समस्या पैदा हुई और इसके जवाब में कई क्षेत्रीय शक्तियों ने अपना अंतरराष्ट्रीय प्रभाव स्थापित करने का प्रयास शुरू कर दिया। रूस और चीन के विस्तारवादी चरित्र के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति का संकट पैदा होने लगा, ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय संगठन अपनी वास्तविक भूमिका निभाने में असमर्थ हो गए। 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय संकट बड़े युद्ध में बदल रहे हैं। आज भारत अपनी राजनीति और अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के कारण दुनिया के कमजोर देशों और ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज बनकर उभरा है। 

भारत का दृष्टिकोण सदैव मानवतावादी और तार्किक दृष्टिकोण पर आधारित रहा है, आज भारत न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित कर सकता है अपितु आतंकवाद, गरीबी, भुखमरी, पर्यावरणीय समस्याओं का सही समाधान दे सकता है।

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