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इमरान की पार्टी के उम्मीदवार संजरानी दूसरे कार्यकाल के लिए सीनेट के सभापति निर्वाचित

By भाषा | Updated: March 12, 2021 21:28 IST

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इस्लामाबाद, 12 मार्च पाकिस्तान सरकार समर्थित उम्मीदवार सादिक संजरानी एक बार फिर शुक्रवार को संसद के उच्च सदन सीनेट के सभापति पद के लिए निर्वाचित हुए। उनकी इस जीत को प्रधानमंत्री इमरान खान और सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

सीनेट के मौजूदा सभापति संजरानी (42) को प्रधानमंत्री खान के गठबंधन का समर्थन प्राप्त था और उन्होंने संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार तथा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी (68) को हराया।

संजरानी को 99 सदस्यों वाली सीनेट में 48 मत मिले जबकि गिलानी को 42 मतों से ही संतोष करना पड़ा। चुनाव के नतीजे संयुक्त विपक्ष के लिए झटका हैं क्योंकि उच्च सदन में बहुमत होने के बावजूद उसे हार का मुंह देखना पड़ा। चुनाव में कुल 98 सीनेटरों ने मतदान किया।

डॉन समाचार पत्र के अनुसार विपक्ष ने चुनाव के परिणाम को उस समय चुनौती दी जब यह घोषणा की गई कि विपक्षी उम्मीदवार गिलानी के पक्ष में दिए गए सात मतों को खारिज कर दिया गया।

लेकिन पीठासीन अधिकारी सैयद मुजफ्फर हुसैन शाह ने उनकी आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सात वोट इसलिए खारिज किए गए क्योंकि उन पर मुहर तरीके से नहीं लगी थी। एक वोट इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि यह दोनों उम्मीदवारों के पक्ष में था।

विपक्षी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने गिलानी और मौलाना अब्दुल गफूर हैदरी को क्रमशः सभापति और उप सभापति पदों के लिए मैदान में उतारा था।

सरकार ने पहले ही घोषणा की थी कि निवर्तमान सभापति संजरानी एक और कार्यकाल के लिए उसके उम्मीदवार होंगे। प्रधानमंत्री खान ने सीनेटर मिर्जा मोहम्मद अफरीदी को उप सभापति पद के लिए नामित किया था।

एक मतदान केंद्र पर छिपे हुए कैमरे और माइक्रोफोन मिले। विपक्ष ने इसे 'वाटरगेट' की तरह मामला बताया। संविधान के अनुसार सीनेट चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होते हैं।

विपक्ष ने परोक्ष रूप से इस काम के लिए देश की एक जासूसी एजेंसी पर अंगुली उठायी और कहा जा रहा था कि संजरानी को कथित तौर पर सैन्य प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त है।

मतदान से एक दिन पहले, सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने अपने सीनेटरों को संजरानी को वोट देने की कुरान पर शपथ दिलाई थी।

एक सीनेटर ने चुनाव का बहिष्कार करते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों ही उनके वोट के लायक नहीं हैं।

संजरानी ने सभापति पद की शपथ ली और फिर उपसभापति पद के लिए चुनाव हुआ।

मौलाना अब्दुल गफूर हैदरी विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार थे जबकि मिर्जा मोहम्मद अफरीदी सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार थे। अफरीदी को 54 वोट मिले जबकि हैदरी को 44 वोट मिले। उच्च सदन में कुल 100 मतों में से 98 वोट पड़े और कोई मत खारिज नहीं हुआ।

उच्च सदन में विपक्ष के 52 सदस्य हैं जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के 47 सीनेटर हैं।

इस बीच, विपक्ष ने पीठासीन अधिकारी को एक पत्र लिखकर मांग की है कि जासूसी कैमरों से संबंधित घटना की जांच के लिए सीनेट की एक समिति गठित की जाए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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