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एक युग का अंत : 16 वर्षों बाद एंजेला मर्केल की चांसलर पद से विदाई

By भाषा | Updated: December 8, 2021 19:59 IST

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बर्लिन, आठ दिसंबर (एपी) एंजेला मर्केल ने 22 नवंबर 2005 को जर्मनी की पहली महिला चांसलर बनते ही इतिहास में अपना स्थान दर्ज करा लिया था।

अगले 16 वर्षों तक जर्मनी का प्रभाव बढ़ाने का श्रेय इन्हीं को जाता है। उन्होंने टुकड़ों में बंटे यूरोपीय संघ को एक किया, कई संकटों का प्रबंधन किया और महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं।

अब जब वह 67 वर्ष की उम्र में पद से हट रही हैं तो विदेशों एवं घर में भी उनके कार्यों की सराहना हो रही है। ओलाफ शोल्ज बुधवार को जर्मनी के नए चांसलर बने।

पूर्व वैज्ञानिक मर्केल पूर्वी जर्मनी में पलीं बढ़ीं और उनका कार्यकाल कभी उनके मार्गदर्शक रहे हेल्मुट कोल से सिर्फ एक हफ्ते कम रहा। कोल ने 1982 से 1998 तक के कार्यकाल के दौरान जर्मनी का एकीकरण किया था।

मर्केल ने अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों, फ्रांस के चार राष्ट्रपतियों, ब्रिटेन के पांच प्रधानमंत्रियों और इटली के आठ प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। उनके चांसलर रहते कई बड़ी चुनौतियां आईं जिनमें वैश्विक आर्थिक संकट, यूरोप का ऋण संकट, 2015-16 में यूरोप में शरणार्थियों की बाढ़ और कोरोना वायरस महामारी प्रमुख हैं।

अमेरिका के बर्लिन कार्यालय में जर्मन मार्शल फंड की उप निदेशक सुधा डेविड विल्प ने कहा, ‘‘इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने जर्मनी को काफी सशक्त किया।’’

डेविड विल्प ने कहा, ‘‘जब वह पहली बार 2005 में सत्ता में आईं तो कई लोगों ने उनको तवज्जो नहीं दी, लेकिन उनका कद बढ़ता गया और दुनिया में जर्मनी की भूमिका भी बढ़ती गई। यूरोप एवं अन्य देश चाहते हैं कि विश्व में जर्मनी सक्रिय भूमिका निभाए लेकिन उनके पद संभालने से पहले ऐसा नहीं था।’’

मर्केल के अंतिम यूरोपीय संघ सम्मेलन में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अक्टूबर में एक वीडियो संदेश में ‘‘इतने वर्षों तक संकट के दौर में भी नैतिक रूप से कार्य करने के लिए’’ धन्यवाद दिया।

क्रीमिया को अलग करने तथा पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन करने के लिए रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंध लगाने में मर्केल का बड़ा योगदान रहा और उन्होंने वहां राजनयिक समाधान लाने में अधूरे प्रयासों को भी आगे बढ़ाया। डेविड विल्प ने कहा, ‘‘उन्हें पश्चिम की तरफ से पुतिन (रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर) से वार्ता के योग्य भी माना गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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