लैंडिंग के वक्त तक चांद की जमीन पर 108.4 वर्ग मीटर क्षेत्र की करीब 2.5 टन मिट्टी उड़कर अपनी जगह से हट गई। मिट्टी हटने की वजह से चांद की सतह पर एक गड्ढेनुमा संरचना बनी है, इसे ही विज्ञान की भाषा में 'इजेक्टा हालो' कहा जा रहा है। ...
अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान मिशन का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें अब तक विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियाँ जैसे मानव-रेटेड लॉन्च वाहन और सिस्टम योग्यता शामिल हैं। ...
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने एक कार्यक्रम में कहा कि नासा-जेपीएल से लगभग पांच-छह लोग (इसरो मुख्यालय में) आए और हमने उन्हें चंद्रयान-3 के बारे में समझाया। ...
सुपरमून तब घटित होता है जब चंद्रमा अपनी अण्डाकार कक्षा में पृथ्वी के सबसे करीब पहुंच जाता है जिससे बढ़े हुए आकार और बढ़ी हुई चमक के कारण चंद्रमा अपने आकार से काफी बड़ा दिखाई देता है। ...
अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, “एपीएक्सएस और एलआईबीएस पेलोड बंद हैं। इन पेलोड से डेटा लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किया जाता है। फिलहाल, बैटरी पूरी तरह चार्ज है। ...
चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के चांद की सतह पर उतरने के 14 दिन बाद रात (चंद्र रात) हो गई थी जिसके कारण दोनों को स्लीप मोड में भेज दिया गया था। इन्हें फिर से एक्टिव करने का प्रयास 23 सितंबर को किया जाएगा। ...
‘चंद्रयान-1’ से मिले रिमोट सेंसिंग डेटा का विश्लेषण कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया है कि पृथ्वी के उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन संभवत: चंद्रमा पर जल बना रहे हैं। ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ पत्रिका में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉन संभवत: चंद्रमा पर जल ...