2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचन्द गांधी को दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। वे सत्य और अहिंसावादी थे। उन्होंने 200 सालों की अंग्रेजी हुकुमत को अहिंसावादी अंदोलनों से उखाड़ फेंका। इसमें स्वदेशी अंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह जैसे प्रमुख आंदोलन हैं। आजादी के वक्त वह भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के खिलाफ थे। आजादी के बाद 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। Read More
देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था, जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान व 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। ...
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। आठ अगस्त का दिन अफगानिस्तान में भी एक महत्वपूर्ण घटना का गवाह रहा है। 1988 में आठ अगस्त के दिन ही नौ वर्ष के युद्ध के बाद अफगानिस्तान से रूसी सेना की वापसी की शुरुआत ह ...
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर ओडिशा विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस और भाजपा के बीच शनिवार को लगातार दूसरे दिन तीखी नोकझोंक हुई। ...
आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना छोड़ दिया। वकीलों ने अदालत में जाने से मना कर दिया। कई कस्बों और नगरों में श्रमिक हड़ताल पर चले गए। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक 1921 में 396 हड़तालें हुई जिनमें छह लाख श्रमिक शामिल थे ...
31 जुलाई के दिन का देश के स्वतंत्रता संग्राम में खास महत्व है। दरअसल दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद महात्मा गांधी ने गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे अपना आश्रम बनाया और यहां जीवन के कुछ नये प्रयोग किए जैसे खेती, पशु पालन और खादी। ...
प्रमुख घटनाओं में 1949 की 12 जुलाई का जिक्र किया जा सकता है, जब आरएसएस पर लगाए गए प्रतिबंध को सशर्त हटा लिया गया। दरअसल जनवरी 1948 में नाथुराम गोडसे के हाथों महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। ...
भाजपा के वीरेंद्र सिंह ने आम बजट को अतीत की गलतियों को सुधारने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने वाला बताते हुए कहा कि स्वदेशी की अवधारणा पर आधारित बजट ने देश की राजनीति में पैदा हुए भरोसे के संकट को कम किया है। ...
उर्दू शायर मंजूर हाशमी का एक शेर पढ़ते हुए कहा, ‘‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है।’’ सीतारमण ने अपने करीब सवा दो घंटे के बजट भाषण में लंबे समय तक ग्रामीण भारत की बात की और इस दौरान महात्मा गांधी के इस वाक्य को उद्धृत ...