लाइव न्यूज़ :

चुनाव से पहले WhatsApp ने दी पार्टियों को चेतावनी, नहीं मानी ये बात तो बंद हो सकती है सर्विस

By जोयिता भट्टाचार्या | Updated: February 7, 2019 12:14 IST

WhatsApp के कम्यूनिकेशन प्रमुख कार्ल वूग ने बताया, 'प्रस्तावित नियमों में से जो सबसे ज्यादा चिंता का विषय है, वह मेसेजेज को ट्रेस करना यानी उसके सोर्स का पता लगाने पर जोर देना है।'

Open in App

भारत में कारोबार कर रहीं सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित कुछ नियम अगर लागू हो जाते हैं तो इससे भारत में WhatsApp के अस्तित्व पर खतरा आ जाएगा। कंपनी के एक शीर्ष कार्यकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। भारत में व्हाट्सऐप के 20 करोड़ मंथली यूजर्स हैं और यह कंपनी के लिए यह दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। कंपनी के दुनियाभर में कुल 1.5 अरब यूजर्स हैं।

व्हाट्सऐप के कम्यूनिकेशन प्रमुख कार्ल वूग ने बताया, 'प्रस्तावित नियमों में से जो सबसे ज्यादा चिंता का विषय है, वह मेसेजेज को ट्रेस करना यानी उसके सोर्स का पता लगाने पर जोर देना है।'

whatsapp

फेसबुक के स्वामित्व वाली WhatsApp डिफॉल्ट रूप से एंड-टु-एंड एनक्रिप्शन की पेशकश करता है, जिसका मतलब यह है कि केवल भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही मेसेज को पढ़ सकता है और यहां तक कि व्हाट्सऐप भी अगर चाहे तो भेजे गए मेसेज को पढ़ नहीं सकता है। वूग का कहना है कि इस फीचर के बिना व्हाट्सऐप बिल्कुल नया प्रॉडक्ट बन जाएगा।

वूग अमेरिका में बराक ओबामा के राष्ट्रपति कार्यकाल में उनके प्रवक्ता के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने कहा, 'प्रस्तावित बदलाव जो लागू होने जा रहे हैं, वह मजबूत गोपनीयता सुरक्षा के अनुरूप नहीं हैं, जिसे दुनियाभर के लोग चाहते हैं।'

उन्होंने कहा, 'हम एंड-टु-एंड एनक्रिप्शन मुहैया कराते हैं, लेकिन नए नियमों के तहत हमें हमारे प्रॉडक्ट को दोबारा से गढ़ने की जरूरत पड़ेगी।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में मेसेजिंग सेवा अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं रहेगी।

whatsapp

वूग ने नए नियम लागू होने के बाद भारतीय बाजार से बाहर निकल जाने की संभावना को खारिज नहीं करते हुए कहा, 'इस पर अनुमान लगाने से कोई मदद नहीं मिलेगी कि आगे क्या होगा। इस मुद्दे पर भारत में चर्चा करने के लिए एक प्रक्रिया पहले से ही है।'

एंड-टु-एंड एनक्रिप्शन फीचर से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अफवाह फैलाने वाले अभियुक्तों तक पहुंचना मुश्किल होता है। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नियमों के तहत उनके अपनी सेवाओं के दुरुपयोग और हिंसा फैलाने से रोकने के लिए एक उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

टॅग्स :व्हाट्सऐपलोकसभा चुनावलोकसभा संसद बिलएंड्रॉयड ऐप्सऐपस्मार्टफोन
Open in App

संबंधित खबरें

भारत'मोदी सरकार ने नक्सलवाद को खत्म कर दिया': अमित शाह ने कांग्रेस से पूछा आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ?

कारोबारबेंगलुरु के स्टार्टअप के साथ 25,000 करोड़ रुपये कागजी एमओयू निरस्त?, एक्शन में सीएम योगी, नपेंगे कई अधिकारी

कारोबारपूछ एआई का टर्न ओवर 50 लाख का और 25000 करोड़ रुपए का एमओयू किया?, जल्दी ही नाता तोड़ेगी योगी सरकार! 

क्राइम अलर्टमहादेव ऐप: ईडी ने दुबई के बुर्ज खलीफा समेत 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की

भारतमहिला आरक्षण विशेष सत्र: केंद्र प्रस्ताव पर जम्मू कश्मीर को क्या फायदा?, लोकसभा सीटों की संख्या 5 से बढ़कर 8?

टेकमेनिया अधिक खबरें

टेकमेनियाएआई: तकनीकी प्रगति या पर्यावरणीय संकट? 

टेकमेनियाPoco M8 5G Launched in India: 50MP कैमरा, 5520mAh बैटरी और 15,999 की लॉन्च कीमत

टेकमेनियाThe Realme 16 Pro 5G Price: 7000mAh की दमदार बैटरी के साथ इंडिया में लॉन्च हुआ Realme 16 Pro 5G, जानें कीमत, फीचर्स और भी बहुत कुछ

टेकमेनियाGoogle Doodle Today: नए साल के पहले दिन पर गूगल ने बनाया खास डूडल, जानिए क्यों है ये खास

टेकमेनियाYouTube down: यूट्यूब हुआ डाउन, भारत और यूएस में हजारों यूजर्स ने वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के साथ समस्याओं की शिकायत की