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हो जाए अलर्ट! FaceApp नहीं बल्कि फेक ऐप डाउनलोड कर रहे हैं यूजर्स, फोन से चुरा रहा सारा डेटा

By जोयिता भट्टाचार्या | Updated: July 22, 2019 18:10 IST

ये ऐप यूजर्स को ट्रिक करके उनकी डिवाइस को मालवेयर से इफेक्ट कर रहा है। इन ऐप्स को यूजर्स अपने फोन में इंस्टॉल कर रहे हैं। बता दें कि ये एक मैलवेयर है जो यूजर्स की डिवाइस को इफेक्ट कर रहा है।

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सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे फेसचेंजिंग रशियन ऐप FaceApp इन दिनों दुनियाभर में इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही इस ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। इस ऐप की प्राइवेसी को लेकर सवालों के बीच एक चौकानें वाली बात सामने आई है। फेस ऐप की पॉपुलैरिटी को देखते हुए हैकर्स ने इसी तरह की कुछ 'Fake Apps' बनाई है।

इन फेक ऐप्स को यूजर्स सर्टिफाइड फेसऐप समझ रहे हैं। ये ऐप यूजर्स को ट्रिक करके उनकी डिवाइस को मालवेयर से इफेक्ट कर रहा है। इन ऐप्स को यूजर्स अपने फोन में इंस्टॉल कर रहे हैं। बता दें कि ये एक मैलवेयर है जो यूजर्स की डिवाइस को इफेक्ट कर रहा है।

ऐप में छिपे है मैलवेयर

सिक्योरिटी फर्म Kaspersky ने यूजर्स को चेतावनी दी है कि फेस ऐप की तरह दिखने वाले कुछ फर्जी ऐप्स मौजूद है। इन ऐप्स से यूजर्स की प्राइवेसी, डेटा और सिक्योरिटी को बड़ा खतरा है। कैसपरस्काई लैब्स ने पाया है कि 'MobiDash' नाम के ऐडवेयर के इस्तेमाल से इस मैलवेयर को फेसऐप की शक्ल दी गई है। जिसे यूजर इसे असली फेसऐप समझ बैठते हैं।

सोशल पर वायरल हो रहा ऐप

Kaspersky के मुताबिक, इन फेक ऐप्स को सिर्फ दो दिनों में 500 लोगों ने फेक ऐप को डाउनलोड कर लिया था। फेक ऐप सबसे पहले 7 जुलाई सामने आया था। यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि किसी भी नुकसान से बचने के लिए अनऑफिशियल सोर्स से एप्लिकेशन डाउनलोड ना करें

फ्रेंच सिक्यॉरिटी रिसर्चर एलियॉट ऐंडरसन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'यूजर फेसऐप के अस्पष्ट नियम पर शर्तों पर नाराज हो रहे हैं लेकिन फोन में इंस्टॉल्ड अधिकतर ऐप ऐसे ही नियम और शर्तों के साथ आते हैं। अगर यूजर इन्हें एक बार पढ़ लेंगे तो उन ऐप्स को तुरंत अनइंस्टॉल कर देंगे। उदाहरण के तौर इसकी शुरुआत स्नैपचैट से की जा सकती है।'

आपकी प्राइवेसी पर है खतरा

सिक्योरिटी को लेकर फोर्सपॉइंट के सिक्योरिटी स्ट्रटेजिस्ट Alvin Rodrigues का कहना है कि आपका चेहरा आपका पर्सनल कॉपीराइट है। अगर आप फेस ऐप (FaceApp) जैसी ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप उसे अपनी डिवाइस, फाइल्स लॉगइन करने की परमिशन दे रहे हैं।

गौर करें तो मोबाइल कंपनियां फोन को लॉक या अनलॉक करने के लिए फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है।

2017 में आया था FaceApp

फेसऐप को 2017 को लॉन्च किया गया था। ये ऐप अचानक से अपने ओल्डर फिल्टर के कारण से वायरल हो गया है। ढेर सारे यूजर्स और सेलेब्स ने भी अपनी फोटो पर ओल्ड फिल्टर लगाकर सोशल मीडिया पर बुढ़ापे की तस्वीर शेयर कर रहे हैं।

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