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Ekadashi: एकादशी के दिन क्यों नहीं खाना चाहिए चावल? जानें और किन खाद्य पदार्थों से करें परहेज

By मनाली रस्तोगी | Updated: July 9, 2024 12:52 IST

ऐसा माना जाता है कि जो लोग पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु जी की पूजा करते हैं और एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें जीवन में सफलता के साथ-साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।

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ठळक मुद्देहिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है इसलिए इसे हरि का दिन कहा जाता है।

Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु जी की पूजा करते हैं और एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें जीवन में सफलता के साथ-साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। चूंकि, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है इसलिए इसे हरि का दिन कहा जाता है।

साल में 24 एकादशियां होती हैं जबकि अधिक मास में 26 एकादशियां होती हैं। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की ग्यारहवीं तिथि एकादशी तिथि होती है। हालांकि, आप जानते ही होंगे कि इस दिन चावल खाने पर प्रतिबंध होता है। जी हाँ, आपने सही पढ़ा, एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है।

एकादशी के दिन चावल खाने के दुष्प्रभाव

एकादशी व्रत का एक नियम यह भी है कि एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में सरीसृप का रूप धारण करता है। इसे भले ही महज मान्यता ही माना जाए लेकिन अगर ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो इस दिन चावल खाने से भी व्यक्ति के लिए मुक्ति के दरवाजे बंद हो जाते हैं।

हमें एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाना चाहिए?

एक पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा ने मां शक्ति के क्रोध से बचने के लिए अपना शरीर त्याग दिया था। उस समय उनके अंश पृथ्वी में समा गये और चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा का जन्म हुआ।

एकादशी तिथि वह दिन था जब महर्षि मेधा के अंश पृथ्वी में समा गये थे। तभी से कहा जाता है कि महर्षि मेधा ने चावल और जौ के रूप में ही धरती पर जन्म लिया। यही कारण है कि चावल और जौ को जीवित प्राणी माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।

एकादशी के दिन चावल न खाने का वैज्ञानिक कारण

HerZindagi.Com ने डॉ. आरती दहिया के हवाले से बताया कि वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार चावल में पानी की मात्रा अधिक होती है। मन का कारक ग्रह चंद्रमा का प्रभाव जल पर अधिक होता है। इससे मन बेचैनी की ओर बढ़ता है और किसी एक चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता।

मन की चंचलता के कारण इसका हम पर और हमारी गतिविधियों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। मन में एकाग्रता की कमी के कारण व्रत के नियमों का पालन करने में भी परेशानी होती है। यही कारण है कि एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है।

विष्णु पुराण क्या कहता है?

विष्णु पुराण में कहा गया है कि एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति के सभी पुण्य समाप्त हो जाते हैं क्योंकि चावल मुख्य रूप से भगवान का भोजन है। इसलिए जहां तक ​​संभव हो सके एकादशी के दिन चावल का निषेध करें ताकि किसी भी प्रकार के पाप से बचा जा सके।

एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार किसी भी एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और विष्णु जी के लिए फलाहारी व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मान्यता है कि इस दिन सभी व्यसनों का त्याग कर भगवान की पूजा करनी चाहिए ताकि सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकें। इस दिन लोग मुख्य रूप से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का व्रत और पूजन करते हैं ताकि उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकें।

एकादशी के दिन और क्या नहीं खाना चाहिए?

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इस दिन कुछ अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए ताकि भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिल सके। माना जाता है कि इस दिन चावल के अलावा जौ, मसूर, बैंगन और सेम का सेवन करना भी वर्जित है। इसलिए अगर आप सच्चे मन से श्रीहरि की पूजा करते हैं तो आपको इन चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की पूजा में मीठा पान चढ़ाया जाता है, इसलिए इस दिन पान खाना भी वर्जित माना जाता है। माना जाता है कि एकादशी के दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही सात्विक भोजन करने के साथ भगवान श्रीहरि का जप और व्रत करना चाहिए।

टॅग्स :एकादशीभगवान विष्णु
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