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जानें क्या है Blue Moon, आसमान में दिखेगा दुर्लभ नजारा, जो आज तक कभी नहीं देखा गया

By गुणातीत ओझा | Updated: October 29, 2020 12:26 IST

आसमान में पहली बार ब्ल्यू मून (Blue Moon) दिखने वाला है। इस खगोलीय घटना को लेकर दुनिया के सभी बड़े वैत्रानिक उत्सुक हैं। ऐसा होना लाजमी भी है, क्योंकि इससे पहले आसमान में ऐसा ब्ल्यू मून कभी नहीं देखा गया है।

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ठळक मुद्देआसमान में पहली बार ब्ल्यू मून दिखने वाला है।इस खगोलीय घटना को लेकर दुनिया के सभी बड़े वैज्ञानिक उत्सुक हैं।

Blue Moon: आसमान में पहली बार ब्ल्यू मून (Blue Moon) दिखने वाला है। इस खगोलीय घटना को लेकर दुनिया के सभी बड़े वैज्ञानिक उत्सुक हैं। ऐसा होना लाजमी भी है, क्योंकि इससे पहले आसमान में ऐसा ब्ल्यू मून कभी नहीं देखा गया है। आगामी 31 अक्टूबर (शनिवार) यानी हैलोवीन के दिन आसमान में पहली बार ब्लू मून (Blue Moon) दिखेगा। कोरोना (Corona) संकट जैसे बुरे दौर में 31 अक्टूबर को होने जा रही ये खगोलीय घटना से लोगों को सुखद अहसास होगा। ब्ल्यू के प्रति आपकी जिज्ञासा को कम करते हुए आइए आपको बताते हैं इसके बारे में। Blue Moon एक असामान्य खगोलीय घटना है। वैसे तो यह खगोलीय घटना हर दो या तीन साल में देखने को मिलती है, लेकिन इस साल यानि 2020 में जो नीला चंद्रमा दिखेगा उसे दोबारा देखने के लिए साल 2039 तक का इंतजार करना पड़ेगा।

नासा ने इस ब्ल्यू मून के बारे में बताया है कि ज्यादातर ब्लू मून पीले और सफेद दिखते हैं। इस बार का ब्ल्यू मून पहले दिखे ब्ल्यू मून से बिल्कुल अलग होगा। कैलेंडर के महीने में बदलाव होने पर दूसरी पूर्णिमा के चंद्रमा के भौतिक गुणों (आकार-प्रकार) में बदलाव नहीं होता है, इसलिए इसका रंग एक ही रहता है। नासा ने बताया कि वैसे कभी-कभी नीला चांद दिखना सामान्य है लेकिन इसके पीछे वजह अलग होती है। ये अक्सर वायुमंडलीय परिस्थितियों के चलते नीला नजर आता है। इसमें कैलेंडर का समय बदलने की वजह शामिल नहीं होती है।

इसी तरह की घटना का एक उदाहरण साल 1883 में देखने को मिला था। 1883 में ज्वालामुखी क्राकोटा के फटने से निकली धूल हवा में घुल गई थी। जिसके चलते चांद नीला दिखाई देने लगा था लेकिन इस घटना को खगोलीय घटना नहीं माना गया था। आपको बता दें कि ब्लू मून का अर्थ नीला चांद नहीं है। बल्क‍ि एक माह में दो पूर्ण‍िमा होने पर दूसरी पूर्ण‍िमा के फुल मून को ब्लू मून कहा जाता है। इस तरह की खगोलीय घटनाएं कई साल में एक बार होती हैं। ये ब्लू मून मासिक यानी कैलेंडर के आधार पर होगा। 31 अक्टूबर, 2020 को पूर्णिमा होगी यानी इस दिन पूरा चांद दिखाई देगा। वैसे अक्टूबर के महीने में दो पूर्ण चंद्रमा निर्धारित हैं, लेकिन इसमें बाद का यानी 31 अक्टूबर का पूर्ण चंद्रमा ब्लू मून के रूप में नजर आएगा।

खगोल वैज्ञानिकों ने दावा है कि अगर 31 अक्टूबर की रात आसमान साफ रही तो इस रात कोई भी टेलीस्कोप की मदद से ब्लू मून आसानी से देख सकता है। इस खगोलीय घटना का साक्षी बनने के लिए नेहरू तारामंडल सहित कई खगोल वैज्ञानिक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आपको बता दें कि चंद्र मास की अवधि 29.531 दिनों अर्थात 29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 38 सेकंड की होती है, इसलिए एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होने के लिए पहली पूर्णिमा उस महीने की पहली या दूसरी तारीख को होनी चाहिए। ये 31 अक्टूबर को होने जा रहा है, इसलिए ये खगोलीय घटना खास मानी जा रही है।

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