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रामायण: जब भगवान राम को मिला वनवास, मात्र इतनी थी उनकी उम्र- जानिए यहां

By मेघना वर्मा | Updated: April 20, 2020 10:38 IST

रामायण को हिन्दू धर्म का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। जिसमें भगवान राम की जीवनकथा सुनने को मिलती है।

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ठळक मुद्देधर्म ग्रंथों में अनेक जगहों पर अश्वमेध यज्ञ की बात कही जाती है। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे लेकिन वे वचनबद्ध थे।

भगवान राम की लीला अपरमपार है। कहते हैं राम ही वो नाम है जिसे लेकर आप अपने सारे कष्ट दूर कर सकते हैं। भगवान राम की रामायण से पता चलता है कि उनका जीवन संघर्षों भरा रहा। 14 साल के वनवास के बाद भीषण युद्ध भी लड़ना पड़ा मगर क्या आप जानते हैं कि जिस समय भगवान राम को वनवास दिया गया उस समय उनकी उम्र क्या थी? आइए रामायण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य हम आपको बताते हैं-

रामायण को हिन्दू धर्म का सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है। जिसमें भगवान राम की जीवनकथा सुनने को मिलती है। रामायण महाकाव्य की की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इस महाकाव्य में 24 हजार श्लोक, पांच सौ उपखंड और उत्तर सहित सात कांड हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के करने पर महर्षि वाल्मीकि ने इस ग्रंथ की रचना की थी।

वनवास के समय इतनी थी भगवान राम की उम्र

वाल्मीकि रामायण के अनुसार जिस समय भगवान श्रीराम को वनवास दिया गया था उस समय उनकी आयु लगभग 27 वर्ष खी थी। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे लेकिन वे वचनबद्ध थे। जब श्रीराम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से ये तक कह दिया कि मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ।

श्रीराम को पसंद का अश्मेध यज्ञ

धर्म ग्रंथों में अनेक जगहों पर अश्वमेध यज्ञ की बात कही जाती है। साथ ही इस बात का जिक्र मिलता है कि भगवान राम ये यज्ञ किया करते थे। वाल्मीकि रामायण के अनुसार इस यज्ञ में एक घोड़ा जाता था। ये घोड़ा जहां तक जाता था वहां तक की भूमि यज्ञ करने वाले की मानी जाती थी। 

करना पड़ता था युद्ध

माना ये भी जाता है कि जो भी इस घोड़े का विरोध करता था, उसे यज्ञ करने वाले के साथ युद्ध करना पड़ता था। ये यज्ञ वसंत या ग्रीष्म ऋतु में करवाया जाता था और करीब एक साल इसके प्रारंभिक अनुष्ठानों की पूर्णता में लग जाता था। 

 

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