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महाभारत की कथा: कुरुक्षेत्र का वो बरगद का पेड़ जिसके नीचे श्रीकृष्ण ने दिया अर्जुन को गीता का उपदेश

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 6, 2019 11:34 IST

Mahabharat story in hindi: महाभारत का कुरुक्षेत्र से गहरा नाता है। मान्यता है कि यही वह जगह है जहां कौरव-पांडव के बीच निर्णायक युद्ध लड़ा गया था।

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ठळक मुद्देकुरुक्षेत्र में मौजूद हैं कई ऐसे सबूत तो महाभारत युद्ध की गवाही देते हैंकुरुक्षेत्र में ज्योतिसर है वह जगह जहां से शुरू हुई थी महाभारत की लड़ाई

महाभारत की कहानी के कई ऐसे प्रसंग और उससे जुड़े चिह्न ऐसे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि ये आज भी मौजूद हैं। महाभारत काल की जगहें, उससे जुड़े किले, मंदिर जैसी तमाम चीजें हैं जो कई बार ये विश्वास दिलाती हैं कि महाभारत का युग यूं ही कल्पना नहीं है। ऐसी ही एक अहम जगह कुरुक्षेत्र है। आज हरियाणा में पड़ने वाले इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यही वह जगह है जहां श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का अद्भुत ज्ञान दिया था और कौरव-पांडव के बीच भीषण और निर्णायक युद्ध भी हुआ।

कुरुक्षेत्र का ब्रह्म सरोवर झील: मान्यता है कि ब्रह्म सरोवर के निर्माता भगवान ब्रह्मा हैं। यहां सूर्य ग्रहण के दौरान डुबकी लेना हजारों अश्वमेधा यज्ञों के प्रदर्शन की योग्यता के बराबर माना जाता है। यहीं सरोवर के उत्तर में भगवान शिव का एक मंदिर है। कहते हैं कि इसी सरोवर के तट पर कर्ण ने अपने कवच कुंडल दान किए थे।  

ब्रह्म सरोवर झील

ज्योतिसर- जहां श्रीकृष्ण ने दिया गीता का ज्ञान: कुरुक्षेत्र में ज्योतिसर ही वह जगह है जहां श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। कहते हैं कि महाभारत का युद्ध ज्योतिसर से ही शुरू हुआ। यह वह जगह भी जहां युद्ध से पहले भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपने दिव्य स्वरुप का दर्शन कराया था। यहां एक बहुत पुराना बरगद का पेड़ भी है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह पेड़ गीता के उपदेश का गवाह है। 

भीष्म कुंड: वह जगह जहां घायल होकर धरती पर गिरे थे भीष्ण: भीष्म कुंड यहां मौजूद एक छोटा जलाशय है, जिसकी कहानी आपको हैरान कर देगी। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के समय अर्जुन के बाणों से घायल होकर भीष्ण पितामह इसी जगह बाण की सैय्या पर गिरे थे। यही वो जगह भी है जहां पितामह ने अर्जुन से प्यास बुझाने को कहा था। इसके बाद अर्जुन ने पृथ्वी पर बाण चलाकर यहां जल स्त्रोत को उत्पन्न किया। 

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