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Jitiya Vrat Paran Date and Time: कल द्विपुष्कर योग में रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पारण का समय

By रुस्तम राणा | Updated: September 24, 2024 15:09 IST

हिन्दू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व है। संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए माताएं इस व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत कठिन व्रतों में से एक होता है, जिसमें माताएं निर्जला उपवास करती हैं।

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Jitiya Vrat Paran Date and Time: जितिया व्रत को ही जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए माताएं इस व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत कठिन व्रतों में से एक होता है, जिसमें माताएं निर्जला उपवास करती हैं। जितिया व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 25 सितंबर को रखा जाएगा। 

जितिया व्रत की परंपराएं एवं महत्व

मान्यता है कि इस व्रत के परिणामस्वरूप माता-पिता को सम्मान मिलता है क्योंकि उनके बच्चे बड़े होकर तेजस्वी और लंबे समय तक जीवित रहते हैं। यह व्रत नहाय खाय के साथ शुरू होता है। इसमें व्रती माताएं झिंगली, खमरूआ, सतपुतिया, नोनी का साग और मड़ुआ की रोटी खाती हैं। हालांकि, जितिया व्रत रखने वाले सभी राज्यों में नहाय खाय का प्रचलन नहीं है। 

इस व्रत को करने वाला पारण करने और सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत तोड़ सकता है। आम तौर पर जितिया व्रत का समापन अगले दिन नवमी तिथि को होता है। एक प्रकार से जितिया व्रत के रीति-रिवाज छठ पूजा के समान ही हैं।

जितिया व्रत की तिथि 

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी 24 सितंबर 2024 को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से शुरू होगी। जबकि 25 सितंबर 2024 को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार जितिया व्रत का पालन 25 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा। 

जितिया व्रत का शुभ मुहूर्त 

शुभ मुहूर्त- शाम 4 बजकर 42 मिनट से शाम 06 बजकर 14 मिनट तक।ब्रह्रा मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 36 मिनट से सुबह 5 बजकर 21 मिनट तक।अमृत काल- दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से लेकर 01 बजकर 48 मिनट तक।विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 03 बजे तक।गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 12 मिनट से शाम 06 बजकर 38 मिनट तक।

जितिया व्रत और दुर्लभ योग

इस वर्ष जितिया व्रत पर द्विपुष्कर नाम का योग बन रहा है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बहुत ही शुभ योग माना जाता है। यह योग 25 सितंबर को सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर रात के 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। 

जितिया व्रत पूजा विधि 

सुबह जल्दी व्रत की प्रक्रिया शुरू होती है। जितिया के दिन लोग जल्दी उठकर स्नान करते हैं। स्नान करने के बाद सूर्य नारायण (सूर्य देव) की मूर्ति पर जल चढ़ाना चाहिए। मोमबत्ती, धूप और अन्य सजावट के साथ आरती करने के बाद, भगवान को भोग के रूप में कुछ भोजन अर्पित करें। मिट्टी और गाय के गोबर से चील और शेर की मूर्ति बनाई जा सकती है। कुशा में निर्मित जीमूतवाहन की मूर्ति पर चावल, फूल, धूप, दीप और अन्य प्रसाद चढ़ाएं। विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा सुनें। अर्घ्य देने के बाद पारण अवश्य करें और जरूरतमंदों को दान दें।

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