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Holi Bhai Dooj 2020: होली भाई दूज कब है, क्या है शुभ मुहूर्त और कैसे मनाया जाता है ये त्योहार, जानिए

By विनीत कुमार | Updated: February 25, 2020 10:43 IST

Holi Bhai Dooj 2020: हिंदू धर्म में होली और दीपावली के बाद भाई दूज का त्योहार मनाने की परंपरा है। इस बार होली के बाद भाई दूज का त्योहार 11 मार्च को है।

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ठळक मुद्देHoli Bhai Dooj: दीपावली की तरह होली के बाद भी आता है भाई दूज का त्योहारचैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दूसरी तिथि को मनाया जाता है भाई दूज का त्योहार

Holi Bhai Dooj 2020: बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी के प्रतीक के तौर पर मनाये जाने वाले रंगों के उत्सव होली के ठीक अगले दिन भाई दूज का त्योहार मनाने की परंपरा है। ऐसे में दीपावली के बाद आने वाला भाई दूज सबसे ज्यादा लोकप्रिय है लेकिन होली के बाद के भाई दूज को मनाने का भी बहुत महत्व है। ये नाम से ही साफ हो जाता है कि भाई दूज का त्योहार द्वितीय तिथि को मनाया जाता है।

Holi Bhai Dooj 2020: होली भाई दूज कब है?

हिंदू धर्म से जुड़े कैलेंडर और पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इसके बाद साल के पहले महीने चैत्र के पहले दिन होली मनाई जाती है और फिर दूसरे दिन भैया दूज का त्योहार होता है।

इस बार होली के बाद भाई दूज का त्योहार 11 मार्च को है। इससे पहले 10 मार्च को होली और 9 मार्च को होलिका दहन है। होली भाई दूज पर तिथियों की बात करें तो द्वितीय तिथि 10 मार्च को शाम 7.25 से शुरू हो रही है और इसका समापन 11 मार्च को दिन में 3.30 बजे होगा। 

Holi Bhai Dooj 2020: कैसे मनाते हैं होली भाई दूज का त्योहार

इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर टीका लगाती हैं और उनके लंबे उम्र की कामना करती हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार भैया दूज पर खुद यमराज ने अपनी बहन यमुना के घर जाकर टीका लगवाया था और भोजन किया था। यमराज ने आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भाई अपनी विवाहित बहन के घर जा कर टीका करवाएगा और भोजन करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। 

कहते हैं कि तभी से भाईयों का बहन के घर जा कर टीका लगवाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन बहनें भाई के लिए व्रत भी रखती हैं। कई जगहों पर फलाहार तो कई जगहों पर निर्जला उपवास की भी परंपरा है। कुछ जगहों पर पूजा की थाल सजाकर बहनें भाई के सामने बैठती हैं। उसके माथे पर तिलक लगाती हैं और फिर भाई की आरती उतारती हैं और मिष्ठान खिलाती है। इसके बाद ही वे खुद भोजन ग्रहण करती हैं।

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