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ब्रह्मचर्य पालन करने वाले हनुमान जी को भला सिंदूर से कैसा काम?, महिलाओं की मांग में दिखाई देने वाला सौभाग्य और सुहाग की निशानी?, जानिए कहानी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 31, 2026 16:59 IST

Lord Mahavir:रामचरित मानस के अनुसार जब राम जी मां सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के श्रृंगार कक्ष में पहुंचे।

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ठळक मुद्देदरअसल पवनपुत्र हनुमान भी बहुत बड़े लीलाधर हैं।सौभाग्य और सुहाग की निशानी माना जाता है।लीला का बहुत विस्तार से वर्णन किया गया है।

Lord Mahavir: राम भक्ति शिरोमणि रहे जाने वाले अतुलित बल के स्वामी हनुमान जी के मंदिर में जाने पर हमें अक्सर उनकी प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति नारंगी सिंदूर से लगी हुई दिखाई देती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले रुद्रावतार मारुतनंदन हनुमान जी को भला सिंदूर से कैसा काम क्योंकि सिंदूर तो महिलाओं की मांग में दिखाई देने वाला सौभाग्य और सुहाग की निशानी माना जाता है। दरअसल पवनपुत्र हनुमान भी बहुत बड़े लीलाधर हैं।

जी हां, मां अंजना की कोख से अवतार लेने वाले हनुमान जी के नाम बालपन से ही कई तरह की लीलाओं को करने का प्रसंग हमारे सनातन महाकाव्यों, धर्म ग्रंथों में कई जगह मिलता है।उन्हीं लिलाओं में से एक है हनुमान जी का स्वयं सिंदूर लगाना और वह भी अपने आराध्य श्रीराम की लंबी उम्र के लिए। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में हनुमान जी की इस लीला का बहुत विस्तार से वर्णन किया गया है।

हनुमान जी के सिंदूर लगाने की कथा

रामचरित मानस के अनुसार जब राम जी मां सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के श्रृंगार कक्ष में पहुंचे। उन्होंने देखा कि माता सीता लाल रंग की कोई चीज अपने मांग में सजा रही हैं। हनुमान जी ने उत्सुक होकर माता सीता से पूछा यह क्या है, जो आप मांग में सजा रही हैं। हनुमान जी के इस प्रश्न पर मां सीता कहने लगी कि हमारे शास्त्रों में सिंदूर का बहुत महत्व है।

माना जाता है कि जो स्त्री मांग में सिंदूर भरती है उसका पति स्वस्थ्य रहता है और पति की आयु लम्बी है। इसलिए इस संसार की अन्य सुहागन स्त्रियों की तरह मैं भी श्रीराम की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए अपनी मांग में सिंदूर लगाती हूं। माता सीता के मुख से ऐसा सुनकर हनुमान जी सोच में पड़ गये।

अगर पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लें तो प्रभु श्रीराम की उम्र लंबी हो जाएगी

उसके बाद उन्होंने सोचा कि वो भी रामभक्त हैं और अगर वो अपने मांग ही नहीं अगर पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लें तो प्रभु श्रीराम की उम्र लंबी हो जाएगी। उसके बाद हनुमान जी ने अपने सारे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और उसी अवस्था में श्री राम के दरबार में उपस्थित हुए। राम के दरबार में पहुंचते ही सभी दरबारी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगे और स्वयं श्रीराम के अधरों पर भी मुस्कान तैरने लगी।

प्रभु राम ने अपने भक्त हनुमान जी से इसका कारण पूछा। तब हनुमान जी ने कहा कि मां सीता ने मुझे बताया था कि वह अपनी लम्बी आयु की कामना के लिए मांग में सिंदूर लगाती है। हनुमान जी ने कहा कि मैंने बहुत सोचा कि अगर मांग में सिंदूर लगाने से आपकी आयु बढ़ती है तो क्यों न मैं अपने सारे शरीर पर सिंदूर लगा लूं ताकि आप अमर हो जाए। श्रीराम ने हनुमान जी का अपने प्रति इतना स्नेह देखकर हनुमान जी को गले से लगा लिया। माना जाता है इसी कारण से ही हनुमान जी के प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को सिंदूर का लेप लगाया जाता है।

हनुमान जी को कैसे लगाएं सिंदूर, क्या हैं इसके लाभ

हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने से मनुष्य के सारे कष्टों का हरण हो जाता है क्योंकि सिंदूर सौभाग्य और उर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर लगाया जाता है। इससे सिंदूर चढाने वाले पर हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

जिन लोगों के कुंडली में शनि दशा भारी चल रही हो, उन्हें जरूर शनिवार को हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर लेप लगाना चाहिए। मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने शनिदेव की जान बचाई थी, जिससे खुश होकर शनिदेव ने कहा था कि वह कभी भी हनुमान भक्तों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इसलिए शनिवार को हनुमान जी की मूर्ति को सिंदूर चढ़ाने का प्रावधान है।

हनुमान जी के सामने क्यों जलाते हैं चमेली का तेल का दीपक

मान्यता है कि चमेली के तेल का दीपक जलाने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि भक्त जब भी हनुमान जी के मंदिर में पूजा करने जाएं तो उन्हें केवल चमेली के तेल में सिंदूर न लगाएं बल्कि चमेली के तेल का दीपक भी जलाएं। ऐसी मान्यता है कि चमेली के तेल का दीपक हनुमान जी के सामने जलाने से दुश्मनों का नाश हो जाता है और बुरे से बुरे ग्रहों के प्रकोप से शांति मिल जाती है।

टॅग्स :हनुमान जयंतीHanuman Chalisaहनुमान जी
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