लाइव न्यूज़ :

Dhanteras 2019: जब देवताओं ने मनाया धनतेरस, जानें राजा बलि और वामन अवतार इस त्योहार का कनेक्शन

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: October 18, 2019 17:53 IST

देवताओं के डॉक्टर और औषधियों के जनक भगवान धन्वंतरी की जयंती और यमराज की पूजा के अलावा भी धनतेरस की एक कथा प्रचलित है। इसका सीधा संबंध महान दैत्यराज बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से है।

Open in App

देवताओं के डॉक्टर और औषधियों के जनक भगवान धन्वंतरी की जयंती और यमराज की पूजा के अलावा भी धनतेरस की एक कथा प्रचलित है। इसका सीधा संबंध महान दैत्यराज बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से है। कथा कुछ इस प्रकार है कि समुंद्र मंथन से मिले रत्नों को हासिल करने को लेकर देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया, जिसे देवासुर संग्राम कहा जाता है।

देवासुर संग्राम में इंद्र ने महाबलीपुर के राजा बलि पर अपने सबसे शक्तिशाली हथियार वज्र से प्रहार किया जिससे उसकी मृत्यु हो गई लेकिन दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मंत्रों की शक्ति से उसे फिर से जीवित कर दिया। इस बार बलि और भी बलवान होकर आया। बलि ने विश्वजीत और अश्वमेघ यज्ञ किए और स्वर्ग जीत लिया। देवताओं का सारा राज्य, धन-वैभव संपदा सब बलि के अधीन हो गई। शुक्राचार्य ने बलि से सौ यज्ञ संपन्न करने के लिए कहा था, सौवें यज्ञ के बाद अनंतकाल के लिए स्वर्ग उसके पास रहता। देवताओं की हालत पर तरस खाकर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से दान मांगा। 

दैत्यगुरु शुक्राचार्य भांप गए थे के वामन के रूम में खुद भगवान विष्णु बलि से दाम मांगने आए हैं। उन्होंने बलि को सावधान किया। बलि को महान दानवीर को तौर पर भी जाना जाता था तो वह अपने वामन भगवान को दान देने का वादा कर चुका था। वह अपने वादे से मुकरना नहीं चाहता था। 

अपना संकल्प पूरा करने के लिए बलि ने कमंडल से जल हथेली पर लेना चाहा। इस पर दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने छोटा से रूप धर लिया और कमंडल में जलनिकासी के द्वारा में घुस गए ताकि पानी बाहर न आ सके। इस पर भगवान वामन ने हाथ में लिए कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई और वह तड़पड़ाकर बाहर आ गए।  

राजा बलि ने कमंडल से जल हाथ में लेकर संकल्प किया। भगवान वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। भगवान वामन ने एक पग भूमि से पूरी धरती को नाप लिया। दूसरे पग से पूरे अंतरिक्ष का नाप लिया। तीसरे पग के लिए जगह नहीं बची तो बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। इस तरह बलि के पास जो कुछ था, वह गंवा बैठा। देवताओं को एक बार फिर उनका खोया स्वर्ग सारा धन मिल गया। जिस दिन यह घटना घटी, वह कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि थी। राजपाट धन वैभव फिर से पाकर देवताओं ने धनतेरस मनाया। तब से यह त्योहार मनाया जाता है।

टॅग्स :धनतेरसदिवाली
Open in App

संबंधित खबरें

भारतयूनेस्को विरासत में भारत का सांस्कृतिक आलोक

भारतविश्व धरोहर दीपावली?, यूनेस्को में गूंजे ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’, पीएम मोदी और सीएम योगी ने क्या कहा?, देखिए तस्वीरें और वीडियो

ज़रा हटकेVIDEO: दिवाली स्टंट शो के लिए आदमी ने अपने शरीर पर पटाखे बांधकर फोड़े, यूजर ने कहा, 'ये रोटी के लिए है, रील के लिए नहीं'

कारोबारदिवाली पर रिकॉर्ड 6.05 लाख करोड़ रुपये की बिक्री, कैट ने कहा- टूटे रिकॉर्ड, लोगों ने खरीदे स्वदेशी समान 

भारतMaharashtra: दिवाली पर दर्दनाक हादसा, बच्चे का हाथ में फटा पटाखा, एक आंख की रोशनी गई

पूजा पाठ अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया