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Chaturmas 2024: जुलाई की इस तारीख से शुरू होने वाला है चतुर्मास, चार महीने न करें ये काम, जानें

By मनाली रस्तोगी | Updated: July 3, 2024 05:48 IST

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चातुर्मास जून या जुलाई में शयनी एकादशी से शुरू होता है और अक्टूबर या नवंबर में प्रबोधिनी एकादशी के साथ समाप्त होता है।

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ठळक मुद्देचतुर्मास के दौरान जहां शुभ कार्य करने की मनाही होती है वहीं सामान्य धार्मिक कार्य जारी रह सकते हैं। 2024 में चातुर्मास 17 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुरू होगा और 12 नवंबर को समाप्त होगा।हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत महत्व है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चातुर्मास जून या जुलाई में शयनी एकादशी से शुरू होता है और अक्टूबर या नवंबर में प्रबोधिनी एकादशी के साथ समाप्त होता है। इस चार महीने की अवधि में किसी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं होता है। हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत महत्व है।

ऐसा माना जाता है कि इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु ब्रह्मांड महासागर, क्षीर सागर में गहरी नींद (योग निद्रा) की स्थिति में प्रवेश करते हैं। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से महत्वपूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। 2024 में चातुर्मास 17 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के साथ शुरू होगा और 12 नवंबर को समाप्त होगा।

चातुर्मास के दौरान विवाह और गृहप्रवेश समारोह जैसे शुभ कार्यक्रम आमतौर पर स्थगित कर दिए जाते हैं। इसके बजाय भक्त पूजा, अनुष्ठान और मंत्र जाप पर ध्यान केंद्रित करते हैं। 

चातुर्मास के दौरान न करें ये काम

इस साल यानी 2024 में 17 जुलाई से 12 नवंबर के बीच कोई भी शुभ कार्यक्रम या आयोजन न करें। साथ ही नया वाहन खरीदना, नई प्रॉपर्टी खरीदना, भूमि पूजन, किसी निर्माण की नींव रखना जैसे काम भी न करें।

इसके अलावा इस व्रत में दूध, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मांस और शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। बिस्तर की जगह जमीन पर भी सोना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और वे अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। अगर कोई धन संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है तो उसे इन चौथे महीनों में रोजाना तुलसी की पूजा करनी चाहिए।

चतुर्मास के दौरान जहां शुभ कार्य करने की मनाही होती है वहीं सामान्य धार्मिक कार्य जारी रह सकते हैं। यह समय पूजा-पाठ, व्रत आदि के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान लोग किसी भी प्रकार का व्रत शुरू कर सकते हैं और जो लोग इस समय व्रत शुरू करते हैं उन्हें दोगुना फल मिलता है।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों की Lokmat Hindi News पुष्टि नहीं करता है।)

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