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प्रियंका बोलीं-"गैर गांधी कांग्रेस का अध्यक्ष हो", पार्टी में खामोशी, नई बहस छेड़ दी, कोई नेता बोलने को तैयार नहीं

By शीलेष शर्मा | Updated: August 19, 2020 18:13 IST

प्रदीप छिब्बर और हर्ष शाह की इस किताब में प्रियंका की टिप्पणी का कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ज़रूर खुल कर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जो मुद्दा उन्होंने उठाया प्रियंका की टिप्पणी उसी तर्ज़ पर आयी है। 

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ठळक मुद्देकिताब में प्रियंका के अलावा राहुल गाँधी, अखिलेश यादव, स्मृति ईरानी सहित तमाम युवा नेताओं के विचारों को संकलित किया है।यह किताब उस समय आयी है जब सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की खामोशी का मतलब है कि कोई प्रियंका की टिप्पणी पर बोलना नहीं चाहता।

नई दिल्लीः कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के "इंडिया टुमारो "में छपे साक्षात्कार जिसमें प्रियंका ने कहा "गैर गांधी कांग्रेस का अध्यक्ष हो " ने कांग्रेस के अंदर नई बहस छेड़ दी है।

बावजूद इसके कोई नेता खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। प्रदीप छिब्बर और हर्ष शाह की इस किताब में प्रियंका की टिप्पणी का कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ज़रूर खुल कर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जो मुद्दा उन्होंने उठाया प्रियंका की टिप्पणी उसी तर्ज़ पर आयी है। हर्ष शाह मैकेंजी से जुड़े हैं और बोस्टन में कार्यरत हैं ,जबकि प्रदीप छिब्बर कैलिफ़ोर्निया विश्व विद्यालय से जुड़े हुए हैं जिन्होंने अपनी इस किताब में प्रियंका के अलावा राहुल गाँधी, अखिलेश यादव, स्मृति ईरानी सहित तमाम युवा नेताओं के विचारों को संकलित किया है व ऑक्सफ़ोर्ड ने इसे प्रकाशित किया है।

इस पुस्तक के बाज़ार में आते ही कांग्रेस में सुगबुगाहट शुरू हो गयी है क्योंकि यह किताब उस समय आयी है जब सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस की खामोशी का मतलब है कि कोई प्रियंका की टिप्पणी पर बोलना नहीं चाहता।

पार्टी के एक युवा महासचिव ने बातचीत करते हुए पलट सवाल किया कि क्या प्रियंका सवाल के जबाब में यह कहतीं कि हाँ अगला अध्यक्ष गाँधी परिवार से हो। सभी को पता है कि राहुल गाँधी को ही अध्यक्ष बनना है, यही राय पार्टी कार्यकर्ताओं की भी है। याद करो 9 नवंबर 2000 को जितेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिये सोनिया गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और बुरी तरह पराजित हुए थे।

पार्टी में अध्यक्ष का चुनाव होने पर भी कोई नाम आने वाला नहीं है क्योंकि किसी नाम पर सहमति ही नहीं बनेगी। बावजूद इसके पार्टी में एक वर्ग ऐसा भी है जो फिर से राहुल को अध्यक्ष पद नहीं सौंपना चाहता परन्तु खुल कर विरोध भी नहीं करना चाहता, इसी कारण खामोशी बनी हुयी है। अहमद पटेल, पी चिदंबरम सरीखे नेता प्रियंका के बयान पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता ए के एंटनी पहले ही राहुल के पक्ष में खुल कर बोल चुके हैं। 

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