1 / 11महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजीत पवार का विमान बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटना में एनसीपी नेता और विमान में सवार चार अन्य लोगों की मौत हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में विमान का मलबा आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाई दे रहा था।2 / 11रिकॉर्ड-तोड़ उपमुख्यमंत्री: अजित पवार के नाम महाराष्ट्र के 6 बार उपमुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे जैसे मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया।3 / 11बारामती का किला: 1991 से लगातार 7 बार उन्होंने बारामती विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। उनकी जीत का अंतर हमेशा राज्य में सबसे अधिक रहा, जिससे बारामती विकास का एक मॉडल बन गया।4 / 11बजट के जादूगर: लंबे समय तक वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कई बार राज्य का बजट पेश किया। राजकोषीय प्रबंधन और जटिल आवंटन पर उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें राज्य का 'मिस्टर फाइनेंस' माना जाता था।5 / 11सहकारी क्षेत्र पर पकड़: राजनीति में आने से पहले उन्होंने पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (PDCC) के अध्यक्ष के रूप में 16 साल काम किया। पश्चिमी महाराष्ट्र के चीनी सहकारी कारखानों और दुग्ध संघों पर उनका जबरदस्त प्रभाव था।6 / 11'अजित दादा' - एक कड़क प्रशासक: 'दादा' के नाम से मशहूर अजित पवार अपनी 'नो-नॉनसेन्स' कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। वे सुबह 6 बजे से बैठकें शुरू करने और फाइलों को तुरंत निपटाने के लिए अधिकारियों के बीच प्रसिद्ध थे।7 / 112019 की '80 घंटे की सरकार': 23 नवंबर 2019 की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ अचानक उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि यह सरकार केवल 80 घंटे चली, लेकिन इसने उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत किया।8 / 112023 की बगावत और NCP में फूट: जुलाई 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में बड़ी बगावत की और एकनाथ शिंदे-बीजेपी गठबंधन (महायुति) में शामिल हो गए।9 / 11'घड़ी' चुनाव चिन्ह की लड़ाई: विभाजन के बाद उन्होंने चुनाव आयोग में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः फरवरी 2024 में उन्हें NCP का नाम और 'घड़ी' चुनाव चिन्ह मिला।10 / 11सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर ध्यान: जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने कृष्णा घाटी जैसी विशाल सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया, जो पश्चिमी महाराष्ट्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हुईं।11 / 11पीढ़ियों के बीच का सेतु: शरद पवार की छाया से शुरुआत करने के बावजूद, अजित पवार युवाओं और स्थानीय नेताओं के लिए पार्टी का मुख्य चेहरा बन गए। सीधे 'जनता संवाद' के कारण वे राज्य के सबसे सुलभ नेताओं में से एक थे।