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तीरंदाजी: भारत फिर स्वर्ण पदक से चूका, तीन रजत जीते

By भाषा | Updated: September 26, 2021 11:05 IST

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यांकटन (अमेरिका), 26 सितंबर भारतीय तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेनाम को कंपाउंड महिला व्यक्तिगत फाइनल में बेहद करीबी मुकाबले में कोलंबिया की दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी सारा लोपेज के खिलाफ शिकस्त के साथ यहां विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

व्यक्तिगत पुरुष कंपाउंड वर्ग में विश्व कप के तीन बार के स्वर्ण पदक विजेता अभिषेक वर्मा शनिवार को यहां कड़े मुकाबले में नीदरलैंड के दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी माइक स्क्लोसेर के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 147-148 से हार गए।

भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने अपने अभियान का अंत तीन रजत पदक के साथ किया।

अंकिता भकत रिकर्व वर्ग में एकमात्र भारतीय तीरंदाज बची हैं और वह रविवार को अंतिम आठ के मुकाबले में उतरेंगी।

ज्योति भारत की महिला और मिश्रित युगल कंपाउंड तीरंदाजी टीम का भी हिस्सा थी जिन्हें शुक्रवार को कोलंबिया के खिलाफ एकतरफा हार के साथ रजत पदक मिले थे।

भारत को अब भी इस प्रतियोगिता में अपने पहले स्वर्ण पदक की तलाश है। भारत ने इस प्रतियोगिता में अब तक सबसे अधिक 11 बार पोडियम पर जगह बनाई है। इस दौरान उसके खिलाड़ियों ने नौ बार फाइनल में चुनौती पेश की लेकिन हर बार रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

नीदरलैंड के डेन बोश में 2019 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली ज्योति ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन पांच बार की विश्व कप चैंपियन सारा बेहतर खेल दिखाते हुए 146-144 से जीत दर्ज करने में सफल रही।

ज्योति ने दिन की शानदार शुरुआत की और अपने करियर में पहली बार परफेक्ट 150 का स्कोर बनाया। उन्होंने पांच दौर में अपने सभी 15 तीर 10 अंक पर मारे। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में अंडर 21 विश्व चैंपियन क्रोएशिया की अमांडा म्लिनारिच को छह अंक से हराया।

ज्योति ने कहा, ‘‘सबसे पहले तो धन्यवाद। आज का दिन शानदार रहा क्योंकि मैंने पहली बार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 150 अंक बनाए और मैं बेहद खुश हूं।’’

ज्योति ने सेमीफाइनल में मैक्सिको की आंद्रिया बेकेरा को 148-146 से हराया लेकिन कोलंबिया की तीरंदाज की चुनौती से पार नहीं पा पाई।

ज्योति ने इससे पहले मैक्सिको में 2017 विश्व चैंपियनशिप में रजत और डेन बोश में 2019 में कांस्य पदक जीते। उन्होंने ये दोनों पदक टीम स्पर्धाओं में जीते।

पच्चीस साल की इस तीरंदाज ने कहा, ‘‘मैं खुश हूं क्योंकि पिछली बार मैंने कांस्य पदक जीता था और इस बार रजत पदक। मैंने सोचा कि मुझे वही करना है जो मैं करती आई हूं और अपने ऊपर भरोसा रखना है इसलिए मैंने ऐसा ही किया।’’

ज्योति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले तीन दौर में 28, 29 और 29 अंक बनाए। कोलंबिया की खिलाड़ी हालांकि नौ में से सात तीर पर 10 अंक जुटाकर दो अंक की बढ़त बनाने में सफल रही।

ज्योति ने अंतिम दौर में तीनों प्रयास में 10 अंक जुटाए लेकिन यह काफी नहीं था और सारा ने दो अंक से जीत दर्ज की।

ज्योति ने प्रतियोगिता में अपने अभियान का अंत तीन रजत पदक के साथ किया।

यह पूछने पर कि क्या उन्हें स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का मलाल है, उन्होंने कहा, ‘‘शत प्रतिशत नहीं लेकिन यह ठीक है, एक को जीतना होता है और एक को हारना होता है।’’

ज्योति का अगला लक्ष्य ढाका में 13 से 19 नवंबर तक होने वाली एशियाई चैंपियनशिप है।

उन्होंने कहा, ‘‘नवंबर में एशियाई चैंपियनशिप होनी है इसलिए मेरा अगला लक्ष्य वही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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