नई दिल्लीः राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और विपक्ष पर हमला किया। पीएम ने कहा कि वे 'मोदी तेरी कब्र खुदेगी' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वे इसका सपना देखते हैं और लोकतंत्र की बात करते हैं। वे 'मोहब्बत की दुकान' के साइनबोर्ड लगाते हैं। क्या सार्वजनिक जीवन में ऐसी नफरत होती है? उनकी सरकार रिमोट से चलती थी। मेरी सरकार भी रिमोट से चलती है। 140 करोड़ लोग मेरा रिमोट हैं। इनकी सरकार रिमोट से चलती थी, मेरी सरकार भी रिमोट कंट्रोल से चलती है... लेकिन 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट कंट्रोल हैं।
140 करोड़ देशवासियों के सपने, आकांक्षाएं, देश के नौजवानों के संकल्प... इनके लिए हम जीते हैं, इनके लिए सरकार चलाते हैं। सत्ता हमारे लिए सुख का रास्ता नहीं है, सत्ता हमारे लिए सेवा का माध्यम है। चोरी करना इनका पुश्तैनी धंधा है.. एक गुजराती (महात्मा गांधी) का सरनेम भी चुरा लिया है।
राजनीतिक विद्वेष के कारण हमारे सदानंदन जी मास्टर के दोनों पैर काट दिए गए। भरी जवानी में दोनों पैर काट दिए गए! कटे हुए पैर से वे जिंदगी गुजार रहे हैं, लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में एक भी अपशब्द नहीं निकलता है। ऐसा व्यक्तित्व, सदानंदन जी मास्टर का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं। क्योंकि जिस प्रकार से इतने हमले के बाद भी उन्होंने देश की सेवा का अपना व्रत जारी रखा।
आज देश के नीति-निर्धारण में अपना योगदान दे रहे हैं... ये गर्व की बात है। इनकी सरकार रिमोट से चलती थी, मेरी सरकार भी रिमोट कंट्रोल से चलती है... लेकिन दोनों में अंतर क्या है, सुनिए... राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कल जो हुआ, कांग्रेस के 'युवराज' जिनका शातिर दिमाग है, उन्होंने इस सदन के एक सांसद को 'गद्दार' कहा। उनका अहंकार चरम पर है।
उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले किसी और को गद्दार नहीं कहा। लेकिन उन्होंने उस सांसद को गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे एक सिख हैं। यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। यह सिखों के प्रति उस नफरत का इजहार था जो कांग्रेस में भरी हुई है...वे उस परिवार के सदस्य हैं जिसने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया...यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे लोग कांग्रेस को डुबो देंगे।"