युद्धग्रस्त अफगानिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करने के लिए यहां विभिन्न संगठन सोमवार को एक साथ आए। तालिबान के देश पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान में गहराते संकट के बीच, भारतीय महिला फेडरेशन (एनएफआईडब्ल्यू) सहित कई संगठनों ने स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के संघर्ष में अफगान नागरिकों के साथ एकजुटता का आह्वान किया। तालिबान विरोधी नारे लगाते हुए आयोजकों ने कहा, ‘‘तालिबान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार को बंद करे। हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे। हम संघर्ष के समय में अफगानिस्तान के लोगों के साथ हैं।’’ अफगान नागरिकों के अधिकारों को लेकर दबाव बनाने के लिए विभिन्न संगठनों के 50 से अधिक प्रतिनिधि यहां बाराखंभा रोड पर नेपाल दूतावास के पास एकत्र हुए। प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों ने अपने हाथों में पोस्टर थामे हुए थे, जिनमें लिखा था, ‘साम्राज्यवाद को ना-तालिबान को ना -फासीवाद को ना’, ‘हम अफगानिस्तान के शासक के रूप में तालिबान को स्वीकार नहीं करते, ‘स्वतंत्रता समानता और न्याय के लिए अफगान महिलाओं के संघर्ष के साथ हैं’ और ‘भारत सरकार को भारत में रहने वाले सभी अफगान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।’ एनएफआईडब्ल्यू की महासचिव एनी राजा ने कहा, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं कि अफगानिस्तान के लोगों के उनके राष्ट्र में मानवाधिकारों के साथ-साथ अन्य अधिकारों की रक्षा की जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अफगान महिलाओं और उनके बच्चों में यह विश्वास पैदा करना चाहिए कि उनकी रक्षा की जाएगी।’’ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लैंगिक समानता और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने और अफगानिस्तान के लोगों के जीवन और आजीविका को बचाने का आग्रह किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा), क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस), ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन(एआईएमएसएस) और मुस्लिम वुमन्स फॉरम समेत अन्य ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने भारत सरकार से सभी शरणार्थियों को भारत लौटने की अनुमति देने की अपील की, भले ही उनकी जाति एवं धर्म कुछ भी हो। हाशमी ने कहा, ‘‘हम यहां उन अफगान छात्रों के लिए भी ‘सिंगल विंडो’ चाहते हैं जो अपने मकान मालिकों से परेशानी का सामना कर रहे हैं, उनका वीजा बढ़ाया जाना चाहिए और उन्हें फेलोशिप भी दी जानी चाहिए।’’ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान (अंतरराष्ट्रीय संबंध) में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही एक अफगान नागरिक दीवा सफी ने कहा कि लोग तालिबान पर कभी भरोसा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा,‘‘ तालिबान के बारे में कहा जा रहा है वह बदल गया है लेकिन हम उन पर कैसे भरोसा करें? हम उन्हें कभी स्वीकार नहीं कर पाएंगे। उनके लिए शरिया कानून का मतलब महिलाओं को अपने घरों के अंदर होना चाहिए।
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