Vande Bharat Train: नागपुर सहित विदर्भ के विकास की दृष्टि से महत्वाकांक्षी ब्रॉडगेज मेट्रो रेल परियोजना के लिए अब भारतीय रेलवे ही कोच उपलब्ध कराएगा. इस ब्रॉडगेज मेट्रो में 'वंदे भारत' ट्रेन के कोच लगाए जाएंगे. पहले चरण में यह ट्रेन नागपुर-वर्धा और नागपुर-नरखेड़ के बीच चलाई जाएगी.
इसके लिए महामेट्रो भारतीय रेलवे से क्रमश: 3-3 बोगी लेगा. ऐसे में स्पेशल पर्पज व्हीकल (कंपनी) बनाने की आवश्यकता नहीं होगी. महामेट्रो के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह सबकुछ अभी बातचीत के स्तर पर है. महाराष्ट्र सरकार के बाद रेलवे बोर्ड ने महामेट्रो द्वारा पेश ब्रॉडगेज मेट्रो रेल परियोजना की विस्तृत प्रकल्प रिपोर्ट (डीपीआर) को भले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.
लेकिन वंदे भारत कोच देने, राजस्व साझेदारी और टिकट दर आदि को लेकर अंतिम निर्णय बाकी है. यदि यह निर्णय हो भी जाता है तो इसके बाद केंद्रीय गृहनिर्माण एवं शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी लेनी होगी. फिर आरडीएसओ और रेलवे संरक्षा आयुक्त से मंजूरी मिलने पर ही ब्रॉडगेज मेट्रो औसतन 160 किमी/घंटे की रफ्तार से पटरी पर दौड़ती दिखेगी.
ज्ञात हो कि तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में 16 जुलाई 2018 को नागपुर में ब्रॉडगेज मेट्रो रेल परियोजना को लेकर रेलवे, महामेट्रो और राज्य सरकार के बीच एमओयू हुआ था. इसके तहत नागपुर से वर्धा, नरखेड़, रामटेक और भंडारा के बीच भारतीय रेलवे की पटरी का उपयोग करते हुए अत्याधुनिक ब्रॉडगेज मेट्रो चलाई जानी है.
इसका डीपीआर अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी ने बनाया है. इसमें प्रोजेक्ट की लागत 418 करोड़ रुपए आंकी की गई है. इसमें से आधी से अधिक रकम अत्याधुनिक मेट्रो बोगी खरीदने पर खर्च की जानी है. इस परियोजना पर 70 फीसदी रकम लोन लेकर और 30 फीसदी रकम महाराष्ट्र व केंद्र सरकार की ओर से खर्च की जानी है.
क्या खास है वंदे भारत कोच में
जिस तरह मेट्रो में अलग से कोई इंजन नहीं होता और ट्रेन के पहले कोच में ही पायलट होता है. इसी प्रकार वंदे भारत कोच में भी हमेशा दो या अधिक लोको पायलट रह सकते हैं. ट्रेन को स्पीड देना, थ्रोटल (ब्रेक लगाना), गेट को खोलने-बंद करने का इंडिकेशन देना उन्हीं के इशारों पर होगा.
यह कोच 180 की औसत रफ्तार से पटरी पर दौड़ लगा सकते हैं. एक कोच में 60 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे. एसी कोच में आरामदेह कुर्सियां होंगी. इनमें चार्जिंग प्वाइंट व पर्सनल रीडिंग लैंप होंगे. ऑटोमेटिक स्लाइड गेट होंगे.
हर कोच के गेट के बाहर ऑटो फुट रेस्ट होेंगे, जो स्टेशन आने पर बाहर निकलेंगे. इससे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के गेप को भरा जा सकेगा और हादसे टलेंगे. हर कोच के साथ पैंट्री और प्लेन जैसे वॉशरूम की सुविधा होगी. कोच में एलईडी टीवी भी होगा.