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उत्तर प्रदेश: बाहुबली अमरमणि की रिहाई पर यूपी की राजनीति गरमाई, कांग्रेस करेगी विरोध

By राजेंद्र कुमार | Updated: August 25, 2023 18:23 IST

यूपी की कई सरकारों में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी करीब 20 साल से जेल में थे। अमरमणि के अच्छे आचरण के कारण सूबे की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की अनुमति पर अब कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने उन्हे रिहा करने का आदेश जारी किया है।

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ठळक मुद्देअमरमणि के अच्छे आचरण के कारण रिहा करने का आदेश जारी किया गयाक्या अमरमणि के रिहाई से बदलेंगे पूर्वांचल के सियासी समीकरण?कांग्रेस करेगी अमरमणि त्रिपाठी ही रिहाई का विरोध : अजय राय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी की जेल से रिहाई को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। यूपी की कई सरकारों में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी करीब 20 साल से जेल में थे। अमरमणि के अच्छे आचरण के कारण सूबे की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की अनुमति पर अब कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग ने उन्हे रिहा करने का आदेश जारी किया है।

योगी सरकार के इस फैसले की कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने निंदा ही है। उन्होंने कहा है कि जघन्य अपराध में शामिल लोगों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने भी इस रिहाई के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार से आठ हफ्ते में जवाब मांगा है।

अमरमणि के अच्छे आचरण के आधार पर मिली रिहाई

यूपी की मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला की साल 2003 में हत्या कर दी गई थी। मधुमिता शुक्ला की हत्या लखनऊ के फ्लैट में गोली मारकर की गई थी। जब मधुमिता की हत्या हुई तब वह प्रेग्नेंट थीं, बाद में जब डीएनए की जांच हुई तब पता लगा कि ये अमरमणि त्रिपाठी के डीएनए से मैच हुआ और इस मामले में अमरमणि पर पुलिस का शिकंजा कर गया और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने सियासी गलियारों में तूल पकड़ गए इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराये जाने का आदेश दे दिया।

करीब 24 साल की मधुमिता की हत्या के आरोप में सीबीआई ने पूर्वांचल के बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी तथा उनकी पत्नी मधुमणि को गिरफ्तार किया था। दोनों वर्ष 2003 से जेल में बंद थे, जबकि वर्ष 2007 में उन्हे उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। अब उनकी रिहाई का आदेश राज्यपाल ने अमरमणि और उनकी पत्नी के अच्छे आचरण के आधार पर दिया है।

राष्ट्रपति को लिखा पत्र

अमरमणि त्रिपाठी को सजा दिलवाने की कानूनी लड़ाई लड़ने वाली मधुमिता शुक्ला बहन अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई का विरोध करने के लिए देश की राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। यह चिट्ठी निधि ने प्रदेश की राज्यपाल को भी भेजी है। इस पत्र में निधि ने दावा किया है कि अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी ने कुल सजा का सिर्फ 62 फीसदी हिस्सा ही जेल में बिताया है। बाकि समय वह अस्पताल में रहने के बहाने बाहर ही रहे हैं। निधि शुक्ला ने चिट्ठी में लिखा है कि दोषी पर 33 मुकदमे पहले से ही हैं, ऐसे में उन्हें रिहा नहीं करना चाहिए। अमरमणि एक कुख्यात अपराधी है, मेरी बहन मधुमिता शुक्ला की हत्या इसका 34वां अपराध था।

कांग्रेस के रिहाई की निंदा की

अमरमणि त्रिपाठी बाहुबली नेता हैं। भाजपा को छोड़कर सभी पार्टियों में घूम चुके अमरमणि त्रिपाठी को अब भाजपा वाले ही अच्छे लगते हैं, हालांकि एक समय वह मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह और मायावती के नजदीकी नेता में शामिल थे। इन सभी नेताओं की सरकार में वह मंत्री थे और पूर्वांचल की सियासत में अमरमणि की तूती बोलती थी।

सूबे में चार-चार मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके अमरमणि के जेल से निकलने के बाद भले ही चुनाव ना लड़े लेकिन पूर्वांचल की ब्राह्मण को वह जरूर प्रभावित कर सकते हैं। यह जानते समझते हुए ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई की निंदा की है। अजय राय ने अमरमणि की रिहाई के फैसले को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा लगाने वाली पार्टी महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल लोगों को रिहा कर रही है।

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने यह संकेत भी किया है, कि जिस तरह से केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार अपने सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह और अमरमणि जैसे नेताओं के साथ खड़ी हो रही हैं, उसके लेकर जनता के बीच कांग्रेस आवाज उठाएगी।

पूर्वांचल की सियासत को करेंगे प्रभावित

बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई पर भले ही विरोध के स्वर अभी ज्यादा सुनाई नहीं पड़ रहे हैं, लेकिन इसकी शुरुआत हो गई है। अब कहा जा रहा है कि जल्दी ही यह मामला तूल पकड़ेगा। इसकी वजह है, पूर्वांचल में ब्राह्मण और राजपूत के बीच लंबे समय से चली आ रही वर्चस्व की लड़ाई। यूपी में सभी को पता है कि पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मणों का नेतृत्व हरिशंकर तिवारी कर रहे थे तो ठाकुरों के बीच वीरेंद्र प्रताप शाही की पकड़ बनाए थे।

योगी आदित्यनाथ और तिवारी गोरखपुर की राजनीति में एक-दूसरे के विरोधी रहे। हरिशंकर तिवारी के निधन के बाद राजनीति के उस दौर का द एंड हो चुका है। हरिशंकर तिवारी के दोनों बेटे भीष्म शंकर तिवारी और विनय शंकर तिवारी राजनीति में लेकिन वह ब्राह्मणों का नेतृत्व में सक्षम साबित नहीं हुए। 

ऐसे में अब पूर्वांचल की ब्राह्मण पॉलिटिक्स के लिए अमरमणि के लिए यह गोल्डन चांस है। अब देखना यह है कि 66 साल के हो चुके अमरमणि जो महाराजगंज जिले की नौतनवां सीट से चार बार विधायक रहे हैं, अपनी राजनीति को कैसे आगे बढ़ते हैं। 

अमरमणि को जानने वालों का कहना है कि सियासत की तासीर ही ऐसी है कि नेता कभी खत्म नहीं होता और अमरमणि में जो जुझारू पर है, वह उन्हें शांत बैठने नहीं देगा, ऐसे में वह पूर्वांचल की सियासत को अपने तरीके से चलाएं और अपने खिलाफ बुलंद होने वाली आवाजों का मुक़ाबला करेंगे।

कहा यह भी जा रहा है कि बीते दस वर्षों के दौरान पूर्वांचल में ओबीसी के इर्द-गिर्द सिमट गई की सियासत जिसमे संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर जैसे ओबीसी नेता उभरे हैं को अमरमणि से टक्कर मिलेगी।

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