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UP: पुलिस कप्तान को हटवाने के लिए धरने पर बैठे विधायक, विनय वर्मा ने कहा- सीएम योगी तय करें जनता प्यारी है या अफसर

By राजेंद्र कुमार | Updated: September 11, 2024 18:32 IST

विनय वर्मा का कहना है कि जब तक जिले की पुलिस कप्तान (एसपी) प्राची सिंह को यहां से नहीं हटाया जाएगा तब तक वह धरने पर बैठे रहेंगे।  

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों के विधायकों अब सरकारी अधिकारियों को अनुशासित करने में जुट गए हैं। जिसके चलते सूबे के तमाम विधायक अपने जिलों के डीएम, एसपी और थानाध्यक्ष तक को सबक सीखने, वर्दी उतरवाने और तबादला कराने तक की धमकी देने से संकोच नहीं कर रहे हैं। कुछ विधायकों ने तो अधिकारियों को ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने, ‘उनके हाथ-पैर तोड़ने’ और ‘जूते से मारने’ की भी धमकी दी है।

विधायकों द्वारा दी गई इन धमकियों के तमाम वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए हैं। यह सब तो हो ही कि अपना दल (एस) के विनय वर्मा सिद्धार्थनगर जिले के नगर पालिका ऑफिस के सामने महात्मा गांधी प्रतिमा के पास धरना पर बैठ गए। विनय वर्मा का कहना है कि जब तक जिले की पुलिस कप्तान (एसपी) प्राची सिंह को यहां से नहीं हटाया जाएगा तब तक वह धरने पर बैठे रहेंगे।  

इस वजह से धरने पर बैठा 

योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में यह पहला मौका है जबकि उनकी सरकार के सहयोगी दल का कोई विधायक इस तरह से धरने पर बैठकर जिले की एसपी को हटाने की मांग कर रहा है। जो विधायक विनय वर्मा जिले की एसपी प्राची सिंह को हटाने के लिए धरने पर बैठे हैं, वह अपना दल (एस) के टिकट पर सिद्धार्थनगर जिले की शोहरतगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव जीते हैं।

उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बेहद करीबी बताए जाता है। शोहरतगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने विनय वर्मा का कहा है कि ज़ब से जिले में कप्तान के रूप मे प्राची सिंह आई हैं तब से सभी थानों का रेट सेट हो गया है। थानों की बोली लगने लगी है। थाने के एसओ जनता का शोषण करते हैं। विधायक की थानेदार भी नहीं सुनते।

वह कहते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष से लेकर हर जिम्मेदार को नेता को मैंने पुलिस कप्तान की मनमानी के बारे पत्र लिखा। अवैध खनन के मामले को लेकर सीएम ऑफिस तक में शिकायत की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। ज़ब एक विधायक एसओ तक को नहीं हटवा सकता तो फिर क्या रह गई हमारी अहमियत। 

कप्तान को खुश रखने के लिए एसओ भी नहीं सुनता। कप्तान को सही पैरवी भी नागवार है, इसलिए ना चाहते हुए भी उन्हें धरने पर बैठने का फैसला लेना पड़ा। अब मुख्यमंत्री को तय करना होगा कि जिस जनता की वजह से विधायक बनते हैं और सीएम बनते हैं, उन्हें वह जनता वह जनता प्यारी है या अफसर। अब जिले की कप्तान को यहाँ से हटाना होगा तभी मैं हटूंगा। 

धरने पर बैठने की पार्टी ने नहीं दी अनुमति 

फिलहाल विनय वर्मा के धरने पर बैठने से सूबे की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के नेता और मंत्री इसे उचित नहीं मान रहे हैं। यह नेता चाह रहे हैं कि विनय वर्मा का धरना खत्म हो। इसके लिए अपना दल (एस) के नेताओं से भी संपर्क किया जा रहा है। इसी के चलते अपना दल(एस) के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार पाल ने कहा है कि पार्टी के विधायक विनय वर्मा का धरना बिना पार्टी या मेरी अनुमति के आयोजित किया जा रहा है। 

पार्टी अनुशासन के तहत काम करती है और यह पार्टी की आधिकारिक गतिविधि नहीं है। उनके इस बयान के बाद भी यह कहा जा रहा है कि पार्टी के सीनियर नेताओं की सहमति के बाद ही विनय वर्मा धरने पर बैठे हैं।

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