यूपी में दोपहिया वाहन खरीदने पर मिलेंगे अब 2 हेलमेट?, आदेश पालन नहीं किया तो दुकानदार का लाइसेंस सस्पेंड?
By राजेंद्र कुमार | Updated: January 15, 2026 16:33 IST2026-01-15T16:32:12+5:302026-01-15T16:33:14+5:30
वाहन विक्रेता स्कूटर, स्कूटी और मोटरसाइकिल खरीदने वाले ग्राहक को दिए गए हेलमेट प्रमाण पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों के साथ वाहन पोर्टल पर अपलोड करेगा.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश में हर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 24 हजार लोग सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा रहे हैं. इन दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग दोपहिया वाहन चला रहे थे और इनमें अधिकतर लोगों ने हेलमेट नहीं पहना हुआ था. इसका संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार ने अब दोपहिया वाहन खरीदने पर वाहन विक्रेता को ग्राहक को चालक और पीछे बैठने वाली सवारी के लिए अलग-अलग दो आईएसआई प्रमाणित हेलमेट देना अनिवार्य किया है. ये फैसला भी किया गया है कि वाहन विक्रेता स्कूटर, स्कूटी और मोटरसाइकिल खरीदने वाले ग्राहक को दिए गए हेलमेट प्रमाण पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों के साथ वाहन पोर्टल पर अपलोड करेगा.
प्रदेश सरकार का मत है कि इस व्यवस्था के लागू होने से में सड़क दुर्घटनाओं में हो रहीं मौतों को कम करने में मदद मिलेगी. सरकार की इस सोच के तहत ही परिवहन विभाग ने हेलमेट नियमों को सख्त करने को लेकर यह आदेश जारी किया है.
प्रदेश में इस तरह बढ़ रहे सड़क हादसे
वर्ष सड़क हादसे मौतें
2014 31034 16287
2015 32385 32385
2016 35612 19320
2017 38811 20142
2018 42563 22256
2019 42572 22655
2020 34243 19149
2021 37729 21227
2022 41746 22595
2023 44534 23652
2024 46052 24118
2025 46223 24,776
नोट : वर्ष 2025 के आंकड़े जनवरी से नवंबर तक के हैं.
सीएम योगी की बैठक में हुआ फैसला
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में वर्ष 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 23,652 लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2024 में 24,118 की मौत सड़क दुर्घटना में हुई. जबकि वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर तक 24,776 लोगों की जान दुर्घटनाओं में गई. एक साल में इतने अधिक लोगों का सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाना सरकार के लिए चिंता का कारण बना.
कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवहन विभाग के बड़े अफसरों और सूबे के डीजी के साथ बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के बाबत चर्चा की. बताया जाता है कि इस चर्चा में ही यह तय हुआ कि प्रदेश में दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए. तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों को अलर्ट करने का सिस्टम विकसित किया जाए और दोपहिया वाहन चालकों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए कुछ नए कानूनी कदम किया जाए. उक्त फैसलों के बाद ही ये तय किया गया कि यूपी में हेलमेट की उपलब्धता को वाहन बिक्री प्रक्रिया से जोड़ा जाए,
ताकि नया वाहन लेने वाला कोई भी व्यक्ति बिना हेलमेट सड़क पर न उतरे. सूबे की परिवहन आयुक्त किंजल सिंह का कहना है कि केंद्रीय मोटर यान अधिनियम के तहत बिना हेलमेट वाहन चलाने या सवारी करने पर एक हजार रुपए का जुर्माना और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह तक निलंबित किए जाने का प्रावधान है.
सुप्रीम कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने भी हेलमेट नियमों के कड़ाई से पालन पर चिंता जताते हुए राज्यों को सख्त अनुपालन के निर्देश दिए हैं. उक्त निर्देशों के क्रम में ही परिवहन विभाग ने यह निर्णय लिया है कि सूबे में बिना हेलमेट स्कूटर, स्कूटी और मोटरसाइकिल चलाने वाले चालकों और पिलियन सवारों के खिलाफ नियमित प्रवर्तन अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी.
साथ ही दोपहिया वाहन खरीदने वाले ग्राहक को हेलमेट न देने वाले डीलरों पर भी नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे. यही नहीं दोपहिया वाहन विक्रेता को फार्म में वाहन का चेचिस नंबर, इंजन नंबर, माडल, निर्माण वर्ष के साथ-साथ अब दोनों हेलमेट का कोड नंबर ओर माडल भी अंकित करना होगा.
दुर्घटनाओं को रोकने लिए किए जा रहे प्रयास
किंजल सिंह का यह भी कहना था कि तमाम सख्ती के बाद भी राज्य में बिना हेलमेट पहने वाहन चलाने की घटनाओं पर अभी अंकुश नहीं लगा है. जबकि पिछले वर्ष प्रदेश में हेलमेट न पहनने के मामलों में छह लाख 32 हजार से अधिक चालान किए गए. यह हेलमेट पहनने को लेकर लोगों की लापरवाही को दिखाता है.
जबकि लोग हेलमेट पहनकर ही दोपहिया वाहन चलाएं, इसलिए प्रदेश में ‘हेलमेट नहीं तो ईंधन नहीं’ अभियान के तहत पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद भी लोग बिना हेलमेट पहले तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. ऐसे हादसों को रोकने के लिए ही प्रदेश पुलिस ने राज्य के सर्वाधिक दुर्घटना वाले 20 जिलों को चिन्हित किया है.
इन जिलों के 233 थाना क्षेत्रों में 3233 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों की पहचान की गई है. इन स्थलों पर सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए पुलिस की विशेष टीमों की तैनाती की गई है. सरकार को उम्मीद है कि सड़क दुर्घटओं पर अंकुश लगाने के लिए उठाए जा रहे इन कदमों से सड़क दुर्घटओं की संख्या में कमी आएगी.