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UP Election 2022: यूपी को लेकर गरमाई बिहार की सियासत, जानिए बीजेपी के लिए मुसीबत क्यों बन रहे सहयोगी दल

By एस पी सिन्हा | Updated: January 20, 2022 17:24 IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार की भी सियासत में गर्मा गई है। दरअसल, यूपी में राजनीतिक जमीन तलाशने को लेकर भाजपा के सहयोगी दलों की बेचैनी साफ दिख रही है।

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पटना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार की भी सियासत में गर्मा गई है। यूपी में राजनीतिक जमीन तलाशने को लेकर भाजपा के सहयोगी दलों की बेचैनी साफ दिख रही है। जदयू, वीआईपी ने यूपी में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। राजद भी यूपी चुनाव में भाजपा को हराने के लिए सपा के साथ कमर कस चुकी है। ऐसे में यूपी की राजनीतिक तपिश की आंच बिहार में दिखाई देने लगी है।

राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बात करें तो यूपी में इसके घटक दल एक-दूसरे से अलग राह पर दिख रहे हैं। बिहार एनडीए के सबसे बड़े घटक भाजपा व जदयू के बीच बातचीत अभी बंद नहीं हुई है, लेकिन दोनों के बीच दबाव की राजनीति में कोई कमी नहीं दिख रही है। मुकेश सहनी की विकासशील इनसान पार्टी (वीआईपी) तो खुलकर भाजपा के खिलाफ ताल ठोक रही है तो हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (हम) भी अकेले चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। बिहार में एक साथ रहने वाले ये दल यूपी में "हम आपके हैं कौन" की तर्ज पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। इसका असर बिहार की राजनीति पर भी आ सकता है। इसकी पृष्‍ठभूमि भी तैयार की जा रही है। यूपी विधानसभा चुनाव में जदयू भी भाग्य आजमाने की तैयारी कर चुकी है। जदयू ने अपनी मंशा भाजपा को पहले ही बता दी थी। लेकिन अब तक दोनों दलों के बीच कोई फॉर्मूला तय नहीं हो पा रहा है।

जदयू 51 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। केन्द्र में जदयू कोटे से मंत्री आरसीपी सिंह को पार्टी ने भाजपा से टिकट को लेकर जल्द फाइनल बातचीत करने की जिम्मेदारी दी है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि अगर शीघ्र भाजपा से समझौते का निर्णय नहीं हो होता है तो जदयू के यूपी प्रदेश अध्यक्ष उम्मीदवारों की सूची जारी कर देंगे। उन्होंने उम्मीदवारों की सूची स्वीकृत कर यूपी के प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल को अधिकृत कर दिया है। जाहिर है इसका असर बिहार में अगर हुआ तो बिहार की राजनीति करवट जरूर लेगी। यदि ऐसा हुआ तो शायद इसमें भाजपा अकेली ही रह जाए।

इसके साथ ही मुकेश सहनी भी भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वह भी यूपी में सीट चाह रहे हैं। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। सीटों के तालमेल नहीं होने से मुकेश सहनी नाराज हो गये हैं। इसके बाद बिहार में मुख्य विपक्षी राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने आज मुकेश सहनी से मुलाकात कर अचानक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। दोनों नेताओं के बीच तकरीबन एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि बिहार में सरकार की नैय्या डगमगा गई है। मंत्री सहनी के पास सरकार का पतवार है और पतवार जब्त हो जाएगा तो बिहार में सरकार डूब जाएगी। राजद की ओर से उन्हें पार्टी के साथ आने का निमंत्रण पहले ही दिया जा चुका है। तिवारी ने इससे पूर्व भी कहा था कि सुबह का भूला शाम को घर आ जाये तो उसे भुला नहीं कहते हैं। सहनी राजग के साथ जाने से पूर्व मुख्य विपक्षी राजद नीत महागठबंधन में शामिल थे।

मुकेश सहनी यूपी में भाजपा के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। चुनाव के दौरान निषाद आरक्षण की मांग उठाकर उन्‍होंने भाजपा के लिए असहज हालात बना दिए हैं। यूपी के कई इलाकों में निषाद निर्णायक वोट बैंक हैं, जिसमें मुकेश सहनी की सेंधमारी का असर वहां के राजनीतिक समीकारण पर पड़ता दिख रहा है। यूपी चुनाव के लिए मुकेश सहनी ने अपने 24 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी करते हुए 165 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इनमें से अधिकांश सीटें निषाद समुदाय के प्रभुत्व वाले पूर्वी यूपी में स्थित है। उन्‍होंने कहा है कि कितनी सीटें जीतेंगे यह पता नहीं, लेकिन 25 लाख वोट लाना लक्ष्य है।

ऐसे में मुकेश सहनी के इस कदम का असर बिहार में उनकी राजनीति पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। इसके बाद बिहार में भाजपा ने दबाव बढ़ाया है। इस बीच उन्‍होंने सरकार से समर्थन वापसी की धमकी तक दे डाली है। इसपर भाजपा कोटे के मंत्री नीरज बबलू ने कहा है कि मुकेश सहनी चाहते हैं तो ऐसा कर के देख लें। जबकि भाजपा सांसद अजय निषाद तो उन्‍हें पहले से परिणाम भुगतने की चेतावनी देते रहे हैं। इस तरह से कहा जाये तो वीआईपी प्रमुख यूपी चुनाव के बहाने बिहार में जमकर प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे हैं। मुकेश सहनी ने भाजपा को गठबंधन धर्म निभाने की नसीहत दी है। यूपी विधानसभा चुनाव का नतीजा चाहे जो हो उसका देश की राजनीति के साथ साथ बिहार की राजनीति पर असर पड़ना तय है। भाजपा की हार या जीत बिहार एनडीए में घटक दलों की दबाव की राजनीति को भी प्रभावित करेगी।

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