लखनऊ:उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए सूबे की योगी बीते आठ वर्षों से अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. जिसके चलते बीते आठ वर्षों में पुलिस मुठभेड़ के दौरान 266 अपराधी मारे गए, जबकि 10,990 अपराधी घायल हुए और पुलिस ने 22,306 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया. राज्य में अपराधियों के खिलाफ लिए जा रहे इस एक्शन के बाद भी अभी यूपी में अपराधियों के दो लाख 945 गैंग (गिरोह) सक्रिय हैं.
इस गैंग का पूरा ब्यौरा और इसमें सक्रिय अपराधियों के अपराध की पूरी जानकारी एक्ष ऐप में दर्ज कर ली गई. राज्य के डीजीपी राजीव कृष्ण के अनुसार, एक्ष ऐप में सूबे के सक्रिय अपराधी, इन अपराधियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और हर जिले के टॉप टेन अपराधी तथा भू-माफिया-खनन माफिया आदि का ब्यौरा दर्ज होने के कारण राज्य में सक्रिय माफिया और गैंग लीडर के खिलाफ कार्रवाई की गति तेज होगी.
डीजीपी का कथन :इस एक्ष ऐप का शुभारंभ गत 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था. इस ऐप के जरिए प्रदेश के हर जिले और हर थाने से जुड़ा अपराधियों का डेटा अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समेटा जा सकता है. डीजीपी राजीव कृष्णा के मुताबिक यक्ष ऐप में प्रदेश के अपराधियों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को एकदम व्यवस्थित और अपडेटेड डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा जा जाएगा।
यह ऐप सिर्फ रिकॉर्ड रखने कार्य ही नहीं करेगा बल्कि एआई -आधारित इंटेलिजेंस टूल की तरह काम करेगा. इसमें फेस रिकग्निशन से पहचान, वॉइस रिकग्निशन से आवाज का मिलान, गैंग-लिंक एनालिसिस से नेटवर्क की कड़ियां, और संदिग्ध के इलाके/मूवमेंट में बदलाव पर लोकेशन शिफ्ट अलर्ट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा इसमें अपराधी के डिजिटल रिकॉर्ड स्टोरेज के जरिए पूरी क्राइम हिस्ट्री एक ही जगह मिल सकेगी.
इस कारण प्रदेश में एक्ष ऐप के एसओपी के जरिए पुलिसिंग को पूरी तरफ डेटा ड्रिवेन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. इसके लिए डीजीपी मुख्यालय से सभी पुलिसकर्मियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है. इसके मुताबिक हर बीट पुलिसकर्मी से लेकर थाना स्तर तक अब अपराधियों के साथ हिस्ट्रीशीटरों, माफिया और गैंग मेंबरों का रियल टाइम डिजिटल सत्यापन अनिवार्य किया गया है.
9000 से अधिक पुलिसकर्मी ले रहे प्रशिक्षण
इसके साथ ही यक्ष ऐप के जरिए समूचे यूपी के हर गांव और मोहल्ले की डिजिटल मैपिंग हो रही है. हर अपराधी का जियो-लिंक्ड रिकार्ड तैयार किया जा रहा है. बीट-चौकी थाने तक की डिजिटल मैपिंग हो रही है. इसके चलते बेतरतीब डेटा या डुप्लीकेट गांव या बीट अब नहीं रहेंगे.
इस व्यवस्था के चलते किसी भी अपराधी की मूवमेंट, उसकी मौजूदगी, उसकी सक्रियता या निष्क्रियता सब कुछ सिस्टम में रंग कोडिंग और स्कोरिंग के साथ दिखेगा. बीजेपी के अनुसार, ऐप में दर्ज अपराधियों की इस कुंडली का कारण स्थानीय पुलिस की जवाबदेही और निगरानी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी.
अपराधियों और माफ़ियों की गतिविधियों पर इस ऐप के कारण पुलिस की निगाह उन पर जमी रहेगी और उन पर अंकुश लगाना आसान होगा. डीजीपी राजीव कृष्णा के अनुसार के अनुसार, राज्य के नौ हजार पुलिसकर्मी एक्ष ऐप के इस्तेमाल का प्रशिक्षण ले रही हैं और एक महीने में ऐप से जुड़े सभी माड्यूल का पूर्ण कार्यान्वयन करवा लिया जाएगा.