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SCO Summit 2019: उज्बेकिस्तान में राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा- आतंकवाद से लड़ने के लिए दोहरा चरित्र छोड़ें

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: November 2, 2019 15:40 IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा, आतंकवाद हमारे समाज को हानि पहुंचा रहा है और विकास के प्रयासों को कमजोर कर रहा है।''

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ठळक मुद्देरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए उज्बेकिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।शनिवार (2 नवंबर) को एसईओ की बैठक में हिस्सा लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के सामने दो टूक कहा कि आतंकवाद से लड़ाई के लिए दोहरा चरित्र नहीं चलेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए उज्बेकिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। शनिवार (2 नवंबर) को एसईओ की बैठक में हिस्सा लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों के सामने दो टूक कहा कि आतंकवाद से लड़ाई के लिए दोहरा चरित्र नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और तंत्र को बिना किसी दोहरे मानदंड के अमल में लाना होगा। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा, आतंकवाद हमारे समाज को हानि पहुंचा रहा है और विकास के प्रयासों को कमजोर कर रहा है।''

रक्षा मंत्रालय ने राजनाथ सिंह के बयान को  ट्वीट किया, जिसमें आतंकवाद को लेकर कहा गया, "इस संकट से लड़ने का एकमात्र तरीका अपवादों या दोहरे मानकों के बिना, सभी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तंत्र को आतंकवादियों और उनके समर्थकों से निपटने के लिए मजबूत करना और लागू करना है।''

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के अलावा भी कई मामलों पर भारत का पक्ष रखा जिनमें आर्थिक सहयोग और व्यापार अहम मुद्दे रहे। 

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में एक सड़क का नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर है। रक्षा मंत्री ने बैठक में हिस्सा लेने से पहले ताशकंद स्ट्रीट में जाकर पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि दी। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री का निधन ताशकंद में ही 11 जनवरी 1966 को हुआ था।

उन्होंने शास्त्री मेमोरियल पर मौजूद बच्चों से बात भी की।

बता दें 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने थे। यह एक राजनीतिक और सुरक्षा संहठन है। इसका मुख्यालय चीन के बीजिंग में है। यह 2001 में अस्तित्व में आया था। इस समूह में चीन, रूस, कजाखस्तान, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान और किर्गिस्तान स्थाई सदस्य हैं। 

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