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Jammu-Kashmir: केसर का संकट गहराया, प्रोडक्शन 5-10% तक गिरा, कीमतें 20% बढ़ीं

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: November 21, 2025 09:15 IST

Jammu-Kashmir: हमें चिंता है कि अगर लोकल प्रोडक्शन में गिरावट जारी रही तो दूसरे देशों का केसर मार्केट पर कब्जा कर सकता है।

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Jammu-Kashmir: कश्मीर का दुनिया भर में मशहूर केसर सेक्टर हाल के दिनों में अपने सबसे मुश्किल सालों में से एक का सामना कर रहा है, जिसमें प्रोडक्शन बहुत ज्‍यादा गिरकर आम पैदावार का लगभग 5-10% रह गया है। इस वजह से, बाजार में केसर की कीमतें लगभग 20% बढ़ गई हैं, और व्यापारियों को डर है कि आने वाले हफ़्तों में रेट और भी बढ़ सकते हैं।

पत्रकारों से बात करने वाले किसानों और व्यापारियों ने इस संकट की वजह लंबे समय तक सूखा, मौसम का बदलता पैटर्न और केसर के पारंपरिक खेतों का सिकुड़ना बताया—इन वजहों ने मिलकर इस सदियों पुरानी इंडस्ट्री को भारी झटका दिया है।

पंपोर के केसर उगाने वाले मुहम्मद अशरफ, जिन्हें अक्सर ‘कश्मीर का केसर का कटोरा’ कहा जाता है, ने बताया कि इस साल के प्रोडक्शन ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। वे कहते थे कि हमने प्रोडक्शन में इतनी गिरावट कभी नहीं देखी। हममें से ज्‍यादातर लोगों ने मुश्किल से कुछ ग्राम ही पैदावार की। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कई किसानों के पास केसर की खेती छोड़ने के अलावा कोई आप्शन नहीं होगा।

लेथपोरा की एक और किसान, हलीमा कहते थे कि कम पैदावार ने कई परिवारों को पैसे की तंगी में डाल दिया है। उनके बकौल, केसर हमारी रोजी-रोटी का मुख्य जरिया है। इस साल सिर्फ 5-10% पैदावार के साथ, हमें समझ नहीं आ रहा कि रोज के खर्चे कैसे मैनेज करें। हम सरकार से रिक्वेस्ट करते हैं कि कश्मीर से यह फसल गायब होने से पहले वह तुरंत दखल दे।

केसर का काम करने वाले ट्रेडर्स का कहना है कि सप्लाई की कमी से कीमतों में पहले ही काफी तेज़ी आ गई है। साउथ कश्मीर के अनंतनाग जिले के एक ट्रेडर बशीर अहमद कहते थे कि कुछ ही हफतों में कीमतें लगभग 20% बढ़ गई हैं। अगर मार्केट में स्टाक कम आता रहा, तो हम जल्द ही एक और तेजी देख सकते हैं।

हालांकि उनका यह भी कहना था कि खरीदार, खासकर कश्मीर के बाहर से, पहले से ही कम अवेलेबिलिटी को लेकर चिंता जता रहे हैं। जबकि एक और ट्रेडर, इमरान राथर कहते थे कि डिमांड स्टेबल है, लेकिन सप्लाई बहुत कम है। उनका कहना था कि इस असंतुलन की वजह से रेट बढ़ रहे हैं। हमें चिंता है कि अगर लोकल प्रोडक्शन में गिरावट जारी रही तो दूसरे देशों का केसर मार्केट पर कब्जा कर सकता है।

केसर उगाने वाले अब्दुल मजीद कहते थे कि हमें साइंटिफिक मदद, बेहतर सिंचाई सिस्टम और जमीन पर कब्ज़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। सरकारी मदद के बिना, कश्मीर की केसर इंडस्ट्री को गंभीर खतरा है।

केसर उगाने वालों ने सरकार से तुरंत मदद की अपील की है, जिसमें सही सिंचाई का जरीया पक्का करने, जमीन को बदलने से बचाने और मिशन केसर प्रोजेक्ट को मजबूत करने के उपाय शामिल हैं।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरबिजनेस
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