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हेट स्पीच पर सत्ताधारी दल के नेताओं की चुप्पी और समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण: जस्टिस रोहिंटन नरीमन

By विशाल कुमार | Updated: January 19, 2022 09:00 IST

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने वालों पर सख्त राजद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है, लेकिन हेट स्पीच देने वालों से अधिकारियों द्वारा निपटा नहीं जा रहा है।

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ठळक मुद्देजस्टिस नरीमन ने कहा कि छात्रों और हास्य कलाकारों पर राजद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।अधिकारियों द्वारा नरसंहार का आह्वान करने वाले लोगों पर मामले दर्ज की अनिच्छा पर चिंता जताई।सत्ताधारी दल के लोग न केवल हेट स्पीच पर चुप हैं बल्कि उसका लगभग समर्थन भी कर रहे हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच और नरसंहार के आह्वान की बढ़ती घटनाओं पर शुक्रवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि सांप्रदायिक कट्टरता की बढ़ती घटनाओं के लिए सत्तारूढ़ दल के नेताओं की चुप्पी और समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि जहां छात्रों और हास्य कलाकारों पर राजद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है, वहीं अधिकारियों के बीच नफरत भरे भाषण देने वाले (और) वास्तव में नरसंहार का आह्वान करने वाले लोगों पर मामले दर्ज की अनिच्छा है।

14 जनवरी को मुंबई में डीएम हरीश स्कूल ऑफ लॉ के उद्घाटन के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस नरीमन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने वालों पर सख्त राजद्रोह कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है, लेकिन हेट स्पीच देने वालों से अधिकारियों द्वारा निपटा नहीं जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आपके सामने ऐसे लोग हैं हेट स्पीच दे रहे हैं जो कि एक पूरे समूह के नरसंहार का आह्वान है और अधिकारी उनके खिलाफ मामले दर्ज करने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे पास सत्ताधारी दल के ऊंचे पदों के लोग न केवल हेट स्पीच के लिए चुप हैं बल्कि उसका लगभग समर्थन भी कर रहे हैं।

हेट स्पीच को असंवैधानिक बताने वाले उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू के बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि थोड़ी देर से ही सही लेकिन यह सुनना सुखद था।

इसके साथ ही उन्होंने राजद्रोह कानून को खत्म करने का आह्वान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने सरकार के आलोचकों पर राजद्रोह की धाराएं लगाने पर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि यह राजद्रोह कानूनों को पूरी तरह से खत्म करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति देने का समय है जब तक कि यह किसी को हिंसा के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है।

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट में अपने सात साल के कार्यकाल के बाद जस्टिस नरीमन पिछले साल अगस्त में सेवानिवृत्त हुए थे। उनके प्रमुख फैसलों में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ का 2015 का ऐतिहासिक निर्णय है, जिसमें अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66 ए को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह प्रावधान मनमाना और असंवैधानिक था। सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए व्यक्तियों पर मामले दर्ज करने के लिए इस प्रावधान का नियमित रूप से उपयोग किया जाता था।

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