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सड़क हादसों में अज्ञात मृतकों की पहचान, हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, जानें क्या है पूरा मामला

By भाषा | Updated: August 21, 2022 18:38 IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) की पीठासीन अधिकारी से इस मुद्दे पर मिले ‘संदर्भ’ पर प्राधिकारियों को नोटिस जारी किया।

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ठळक मुद्देभारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।अगली तारीख 27 सितंबर से पहले अपना जवाब दायर करने को कहा।सीआईडीआर यूआईडीएआई के तहत आता है।

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय पहचान डेटा भंडार (सीआईडीआर) के पास उपलब्ध विशिष्ट जानकारियों के आधार पर सड़क दुर्घटनाओं के शिकार अज्ञात मृतकों की पहचान के मुद्दे पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) की पीठासीन अधिकारी से इस मुद्दे पर मिले ‘संदर्भ’ पर प्राधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने यूआईडीएआई, दिल्ली सरकार और दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को नोटिस जारी किया और उनसे इस ‘संदर्भ’ के संबंध में सुनवाई की अगली तारीख 27 सितंबर से पहले अपना जवाब दायर करने को कहा।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने कहा कि कानूनी मुद्दा शामिल होने और सड़क दुर्घटनाएं में शवों की पहचान नहीं होने के मद्देनजर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांतो चंद्र सेन से आग्रह किया जाता है कि वह न्याय मित्र के तौर पर इस अदालत की सहायता करें।

तीन अगस्त को एमएसीटी की पीठासीन अधिकारी कामिनी लॉ ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों के तहत उच्च न्यायालयों को एक ‘संदर्भ भेजा था और आग्रह किया था कि वे सीआईडीआर के पास उपलब्ध विशिष्ट जानकारी के आधार पर मृतकों की पहचान से संबंधित कुछ कानूनी मुद्दों पर मार्गदर्शन के लिए आधिकारिक निष्कर्ष दें।

सीआईडीआर यूआईडीएआई के तहत आता है। सीआईडीआर सरकारी एजेंसी है जो आधार परियोजना के लिए डेटा का भंडारण और प्रबंधन करती है। एमएसीटी की पीठासीन अधिकारी ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा मामलों से निपटने के दौरान कुछ कानूनी बाधाएं सामने आई हैं, जो वैसे मामलों की जांच के दौरान आती हैं, जहां मृतक की पहचान नहीं हो पाती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, वे (पुलिस) यूआईडीएआई से बायोमेट्रिक के आधार पर अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए जानकारी साझा करने का अनुरोध कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूआईडीएआई इस बाबत संबंधित कानूनों की आड़ लेकर किसी भी प्रकार की मदद से इनकार कर रहा है।

‘संदर्भ’ में कहा गया है कि भारत एक कल्याणकारी राज्य है जहां व्यक्तियों/नागरिकों के कल्याण को बायोमेट्रिक के इस्तेमाल में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि आतंक और अपराध के मामलों की जांच में इसको तरजीह दी जाए।

संदर्भ के मुताबिक, ऐसे में सीआईडीआर का क्या फायदा जब अपराध के शिकार अज्ञात लोगों की पहचान का पता लगाने के लिए यूआईडीएआई बायोमेट्रिक जानकारी साझा करने से इनकार कर रहा है? संदर्भ में कहा गया है कि देश के हर नागरिक को अपने परिवार के उन सदस्यों के बारे में जानकारी हासिल करने का अधिकार है, जिनका पता नहीं चल पा रहा है और यही अधिकार अज्ञात मृतक का भी है, खासकर, अपराध के शिकार पीड़ित का, कि उसका परिवार उसकी स्थिति से वाकिफ हो। 

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