पशुपति कुमार पारस से मिले राजद नेता सूरजभान सिंह, दही-चूड़ा भोज में शिरकत, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सियासी समीकरण में बदलाव
By एस पी सिन्हा | Updated: January 15, 2026 16:14 IST2026-01-15T16:14:04+5:302026-01-15T16:14:37+5:30
विधानसभा चुनाव के दौरान सूरजभान सिंह ने पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थाम लिया था।

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पटनाः बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा का भोज रिश्तों में मिठास घोल देता है। यही कारण है कि एक बाहुबली नेता सूरजभान सिंह गुरुवार को मकर संक्रांति के मौके पर पशुपति कुमार पारस के आवास पहुंचे, जहां दही-चूड़ा भोज में उन्होंने शिरकत की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब हालिया बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सियासी समीकरणों में तेज़ बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव के दौरान सूरजभान सिंह ने पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थाम लिया था।
मोकामा से उनकी पत्नी वीणा देवी राजद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरी थीं, लेकिन उन्हें जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद अब सूरजभान सिंह की सियासी चाल बदली हुई नजर आ रही है और वे एक बार फिर पशुपति कुमार पारस के साथ दिखाई दिए हैं। पशुपति कुमार पारस की पार्टी रालोजपा ने विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर चुनाव लड़ा था,
हालांकि पार्टी का कोई भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका। चुनाव में मिली करारी हार के बाद पशुपति कुमार पारस और सूरजभान सिंह का फिर से साथ आना राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को जन्म दे रहा है। हालांकि सूरजभान सिंह और पशुपति कुमार पारस की नजदीकियां नई नहीं हैं। जब रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) का गठन किया था,
तब सूरजभान सिंह उनके सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद लोजपा में नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू हुई। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली और रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा दो गुटों में बंट गई।
एक तरफ चिराग पासवान लोजपा (रामविलास) के साथ आगे बढ़े, तो दूसरी ओर पशुपति कुमार पारस, प्रिंस पासवान, सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह समेत कई सांसद अलग गुट में चले गए। पशुपति कुमार पारस को केंद्र में मंत्री पद भी मिला, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए ने उन्हें कोई सीट नहीं दी।
वहीं चिराग पासवान का कद एनडीए में और मजबूत हुआ। अब, चुनावी झटकों के बाद सूरजभान सिंह और पशुपति कुमार पारस का फिर से एक मंच पर दिखना बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।