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राफेल विवाद: दसॉल्ट ने ब्रांड चमकाने के लिए सुहेल सेठ से किया था 4 साल का करार, हर साल देती थी एक करोड़ 40 लाख

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 3, 2018 13:01 IST

फ्रांस की हथियार बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट से भारत सरकार ने 36 राफेल फाइटर विमान खरीदने का सौदा किया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस डील में नरेंद्र मोदी सरकार ने रिलायंस समूह के कारोबारी अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है। मोदी सरकार ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

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भारत में विवादों से घिरे राफेल फाइटर जेट बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने साल 2011 में विज्ञापन जगत से जुड़े सुहेल सेठ को चार साल के लिए अपने ब्रांड का प्रचार करने के लिए करीब 12 लाख रुपये महीने की नौकरी पर रखा था। दसॉल्ट ने सुहेल सेठ से यह अनुबंध जुलाई 2011 में किया। इस अनुबंध के तहत दसॉल्ट ने चार साल तक सुहेल सेठ को करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये सालाना का भुगतान किया।

दसॉल्ट ने यह समझौता तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा फाइटर जेल खरीदने के लिए दसॉल्ट को चयन की घोषणा से कुछ समय पहले किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कंसल्टेंसी कंपनी काउंसलेज इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर सुहेल सेठ को दसॉल्ट ने चार साल के लिए अनुबंधित किया था। यह करार साल 2011 से 2015 तक का था। सुहेल सेठ ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में दसॉल्ट के साथ अपने अनुबंध की पुष्टि की।

काउंसलेज इंडिया के अलावा विज्ञापन जगत की बड़ी कंपनी ओगल्वी पीआर को दसॉल्ट का पब्लिक रिलेशन (पीआर) मैनेज करने के लिए अनुबंधित किया गया था।

सेठ ने एक्सप्रेस को बताया कि उनका अनुबंध "दसॉल्ट के मूल ब्रांड की छवि बेहतर बनाना" था। सेठ ने बताया कि उन्हें कंपनी से जुड़े कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) की दिशा में काम करना और मूल ब्रांड विज्ञापन और ब्रांडिंग की निगरानी करना था।

सेठ ने एक्सप्रेस अखबार से कहा कि उनके काम का राफेल फाइटर जेट की भारत के रक्षा मंत्रालय के साथ हुई डील में दाम या डिजाइन तय कराने में कोई भूमिका नहीं थी। भारत सरकार ने साल 2016 में राफेल डील फाइनल की थी। 

सुहेल सेठ अभी हाल ही में #MeToo हैशटैग के तहत भी आरोपों से घिर गये थे। सुहेल सेठ का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसमें उनपर पत्रकार मधु त्रेहान को असभ्य तरीके से छूने का आरोप लगा रहा था।

राफेल विवाद

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फ्रांस की हथियार बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट से भारत सरकार ने 36 राफेल फाइटर विमान खरीदने का सौदा किया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस डील में नरेंद्र मोदी सरकार ने रिलायंस समूह के कारोबारी अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है। मोदी सरकार ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी को राफेल डील के बहाने 30 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुँचाया है। राहुल गांधी का आरोप है कि यह डील सीधे पीएम नरेंद्र मोदी के दखल की वजह से अनिल अंबानी को मिली। बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गलत बताते हुए कहा है कि वो इस मुद्दे पर भ्रमित हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच हुए विवाद के मूल में भी राफेल डील की जांच का मसला है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सीबीआई चीफ वर्मा राफेल डील की जाँच करना चाहते थे इसलिए मोदी सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया। बीजेपी ने कांग्रेस के लगाये आरोपों से इनकार किया है।

राफेल डील और सीबीआई विवाद दोनों ही मामले इस समय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। 

टॅग्स :राफेल सौदा# मी टूनरेंद्र मोदीभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)मनमोहन सिंहकांग्रेस
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