नई दिल्लीः विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमें रूसी तेल पर दंडात्मक शुल्क लगाए जाने के अमेरिकी विधेयक के बारे में जानकारी है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक की हालिया टिप्पणियों के बारे में मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने ये टिप्पणियां देखी हैं। भारत और अमेरिका पिछले साल 13 फरवरी को ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध थे। तब से, दोनों पक्षों ने एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए कई दौर की बातचीत की है।
कई मौकों पर हम समझौते के बेहद करीब पहुंचे थे। खबरों में इन चर्चाओं का जो वर्णन किया गया है, वह सटीक नहीं है। हम दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि रखते हैं और इसे पूरा करने के लिए तत्पर हैं। संयोगवश, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 के दौरान 8 बार फोन पर भी बात की है, जिसमें हमारी व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई है।
भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 500 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने संबंधी प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक से संबंधित घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है। भारत और चीन उन चुनिंदा देशों में शामिल हैं जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं।
इस विधेयक को तैयार करने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस सप्ताह कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित कानून को हरी झंडी दे दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘हमें प्रस्तावित विधेयक की जानकारी है।
हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। ऊर्जा स्रोतों के व्यापक प्रश्न पर हमारा रुख सर्वविदित है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में, हम वैश्विक बाजार की बदलती गतिशीलता और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से सस्ती ऊर्जा प्राप्त करने की अनिवार्यता से निर्देशित हैं।’’
भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक की इस टिप्पणी को गलत बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता इसलिए सफल नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात नहीं की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका ने समझौते पर कई दौर की बातचीत की तथा नयी दिल्ली इसे अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने टिप्पणियों को देखा है। भारत और अमेरिका पिछले साल 13 फरवरी को भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध थे।’’ जायसवाल ने कहा कि तब से दोनों पक्षों ने संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए कई दौर की बातचीत की है।
उन्होंने अपनी साप्ताहिक प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘कई मौकों पर हम समझौते के बेहद करीब पहुंच गए थे। संबंधित टिप्पणियों में इन चर्चाओं का जो वर्णन किया गया है, वह सटीक नहीं है।’’ वह लटनिक की टिप्पणियों पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।
जायसवाल ने कहा, ‘‘हम दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि रखते हैं और इसे पूरा करने के लिए तत्पर हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संयोगवश, प्रधानमंत्री (मोदी) और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 के दौरान आठ बार फोन पर बातचीत की, जिसमें हमारी व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।’’
व्यापार समझौते पर अमेरिकी वाणिज्य सचिव की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय कि संबंधित टिप्पणियों में चर्चाओं का वर्णन सटीक नहीं है। हम अमेरिका के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि रखते हैं। कई मौकों पर हम समझौते के बेहद करीब थे।
हम अमेरिका के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि रखते हैं। अमेरिकी वाणिज्य सचिव की भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि हम कई बार समझौते के करीब पहुंचे थे। अमेरिकी वाणिज्य सचिव की व्यापार समझौते पर टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि रिपोर्ट में चर्चाओं का जो वर्णन किया गया है वह सटीक नहीं है।
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा भारत पर 500% टैरिफ लगाने के लिए विधेयक पेश किए जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम इस विधेयक से अवगत हैं और घटनाक्रम पर हमारी नजर बनी हुई है। ऊर्जा स्रोतों के प्रति हमारा दृष्टिकोण आप सभी को ज्ञात है।
इस संबंध में, हमारा दृष्टिकोण वैश्विक बाजारों की स्थिति और हमारी इस अनिवार्यता पर निर्भर करता है कि हम अपने लोगों को उनकी ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा उपलब्ध कराएं। क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता की घटनाओं पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन सीपीईसी माध्यम से शक्सगाम घाटी में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है।
जो भारतीय क्षेत्र है। हमने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। हम लगातार यह कहते रहे हैं कि यह समझौता अवैध और अमान्य है। हम तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को भी मान्यता नहीं देते हैं, जो भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का जबरन और अवैध कब्जा है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। यह बात चीनी और पाकिस्तानी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है। हमने शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत को बदलने के चीनी प्रयासों का लगातार विरोध किया है। हम अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।