Pollution issue raised in Lok Sabha: Instead of burning stubble, vehicles, industries were held responsible | लोकसभा में उठा प्रदूषण का मुद्दा: पराली जलाने के बजाय वाहनों, उद्योगों को ठहराया गया जिम्मेदार
लोकसभा में उठा प्रदूषण का मुद्दा: पराली जलाने के बजाय वाहनों, उद्योगों को ठहराया गया जिम्मेदार

Highlightsसत्ता पक्ष और विपक्ष के विभिन्न दलों के सदस्यों ने वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ती कारों की संख्या भी प्रदूषण का बड़ा कारण है।

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में और देश के अन्य शहरों में इस समय व्याप्त वायु प्रदूषण के पीछे किसानों द्वारा पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराने के दावों को गलत बताते हुए लोकसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विभिन्न दलों के सदस्यों ने वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं को इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने दुनिया के कुछ अन्य शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में भी आबोहवा को पूरी तरह साफ किया जा सकता है और इसके लिए केंद्र तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कमान संभालनी चाहिए। कांग्रेस के मनीष तिवारी, बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा और भाजपा के प्रवेश वर्मा ने कहा कि पराली जलने से प्रदूषण फैलने के दावे निराधार हैं और इसके बड़े कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण एवं अन्य कारण जिम्मेदार हैं।

निचले सदन में नियम 193 के तहत प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को लेकर हर साल पड़ोसी राज्यों पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में किसानों के पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि इस तरह के दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि पराली जलाना गलत है और हम भी उसका समर्थन नहीं करते लेकिन किसानों की आर्थिक सीमाएं हैं और केंद्र सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा। आंकड़ों को देखें तो राजधानी में जहरीली हवा के लिए 41 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों से निकलने वाले धुएं की, 18.6 फीसदी हिस्सेदारी उद्योगों की एवं अन्य कारकों की होती है। तिवारी ने कहा कि छोटे किसानों को वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना उनके साथ इंसाफ नहीं है। बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने भी चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के किसानों को अनावश्यक तरीके से प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लगभग 8-10 अक्टूबर के आपास धान की फसल के अवशेष जलाना शुरू हुआ लेकिन राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में 27 अक्टूबर को दिवाली के अगले दिन वायु प्रदूषण भयावह स्तर पर पहुंच गया। मिश्रा ने कहा कि घटिया स्तर के पटाखे, खासकर चीन के खराब पटाखों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।

इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ती कारों की संख्या भी प्रदूषण का बड़ा कारण है। बड़ी संख्या में लोग मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन के साधनों का इस्तेमाल नहीं करते और अपनी ही गाड़ी में चलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने का समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन छोटे गरीब किसानों को इस काम से रोकने के लिए केंद्र सरकार को मदद देनी होगी।

या तो किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए सब्सिडी दी जाए अथवा पराली से कागज, बिजली, बायोगैस आदि उत्पाद बनाने के संयंत्र लगाकर किसानों को इसे जलाने से हतोत्साहित किया जाए। बीजद सदस्य ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छ भारत अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया है और अब एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर पाबंदी का अभियान चलाया जा रहा है, उसी तरह प्रदूषण के मुद्दे पर भी व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रदूषण के मुद्दे को भी उन्हें अपने हाथ में लेना होगा। बिना नेतृत्व के समाधान नहीं निकल सकता।’’

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा ‘‘ ऐसा नहीं है कि वायु प्रदूषण को कम नहीं किया जा सकता। इसका एक उदाहरण चीन का शहर बीजिंग है जहां सरकार ने युद्धस्तर पर काम शुरू करके वहां की हवा को स्वच्छ किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के दूसरे शहरों की हवा साफ हो सकती है तो हम क्यों नहीं कर सकते। क्या हमारी इच्छाशक्ति में कमी है? क्या संसाधनों की सीमा है? दिल्ली अन्य शहरों की तरह क्यों नहीं बन सकती? सरकार को इसकी गंभीरता, संवेदनशीलता को समझना होगा और युद्धस्तर पर काम करने के लिए रणनीति बनानी होगी।’’ तिवारी ने कहा कि यह दलगत राजनीति का विषय नहीं है।

यह दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने गंगा के प्रदूषण का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की, सभी ने गंगा नदी को साफ करने के प्रयास किये लेकिन सफलता नहीं मिली। तिवारी ने सदन में मांग उठाई कि प्रदूषण विषय पर एक स्थाई समिति बनाई जानी चाहिए जो सिर्फ इससे और जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों को देखे और हर संसद सत्र में एक दिन उसके कामकाज की समीक्षा हो। मिश्रा ने भी कहा कि चीन ने कड़े कदम उठाए और कोयले पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाकर, वाहनों की संख्या पर लगाम लगाकर एवं अन्य उपाय करके बीजिंग के प्रदूषण को कम किया। 

Web Title: Pollution issue raised in Lok Sabha: Instead of burning stubble, vehicles, industries were held responsible
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