महाराष्ट्र नगर निकायों में कांग्रेस और एआईएमआईएम से बीजेपी ने किया गठजोड़?, सीएम फडणवीस सख्त, शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी नहीं और अनुशासन के खिलाफ

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 7, 2026 15:55 IST2026-01-07T14:57:25+5:302026-01-07T15:55:13+5:30

भाजपा (14), कांग्रेस (12) और राकांपा (4) ने मिलकर गठबंधन बनाया और बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं।

polls nagar nigam BJP alliance Congress AIMIM in Maharashtra municipal bodies CM Devendra Fadnavis strict no approval top leadership against discipline | महाराष्ट्र नगर निकायों में कांग्रेस और एआईएमआईएम से बीजेपी ने किया गठजोड़?, सीएम फडणवीस सख्त, शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी नहीं और अनुशासन के खिलाफ

file photo

Highlightsशिवसेना ने इस गठबंधन को “अनैतिक व मौकापरस्ती” बताया।भाजपा की सहयोगी शिवसेना को बाहर कर दिया गया।कांग्रेस या एआईएमआईएम से कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुंबईः महाराष्ट्र में कुछ नगर निकायों में चुनाव के बाद भाजपा ने अपने विरोधी दलों कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ कथित तौर पर गठबंधन कर लिया है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐसे गठबंधन अस्वीकार्य हैं और इन्हें तोड़ दिया जाएगा। पिछले महीने हुए नगर निकाय चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को किनारे कर अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार की राकांपा के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ नामक गठबंधन बनाया। इसी तरह, अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा ने ऑल इंडिया मजलिस -ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन किया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ कहा कि ऐसे गठबंधनों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मंजूरी नहीं दी है और यह अनुशासन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस या एआईएमआईएम से कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा और जिन्होंने ऐसा किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

फडणवीस ने एक न्यूज चैनल से कहा, “मैं साफ कहना चाहता हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन मंजूर नहीं होगा। अगर किसी स्थानीय नेता ने अपनी तरफ से ऐसा फैसला लिया है, तो वह अनुशासन के खिलाफ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे गठबंधनों को खत्म करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।

इस मामले पर शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने कहा कि अकोट और अंबरनाथ की घटनाएं दिखाती हैं कि भाजपा सत्ता के लिए किसी से भी हाथ मिला सकती है। गौरतलब है कि राज्य में भाजपा, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन महायुति की सरकार है। अंबरनाथ में शिवसेना 27 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी,

लेकिन बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई थी। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस और राकांपा के साथ मिलकर 31 सीट का बहुमत हासिल कर लिया। तीनों दलों ने कहा कि यह गठबंधन “शहर को बचाने” और स्थिर प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। वहीं शिवसेना ने इस गठबंधन को “अनैतिक व मौकापरस्त” बताया। शिवसेना के विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे “गठबंधन धर्म” से विश्वासघात करार दिया।

कहा कि यह भाजपा के “कांग्रेस-मुक्त भारत” नारे के भी खिलाफ है। भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष चुनी गईं, जिसके बाद उन्होने बुधवार को शपथ ली। उन्होंने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराया। 20 दिसंबर को हुई 60 सदस्यीय परिषद के चुनाव में शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, लेकिन वह बहुमत से सिर्फ चार सीट पीछे रह गई।

भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और राकांपा को चार सीट पर जीत मिली जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन से तीन दलों के सदस्यों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है, जो बहुमत के आंकड़े से 30 से ज्यादा है। अब उपाध्यक्ष का चुनाव जल्द होने वाला है। समूह के नेता व भाजपा के पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल ने मीडिया से कहा कि यह गठबंधन अंबरनाथ को “भ्रष्टाचार व डर” से मुक्त करने के लिए बनाया गया है। वहीं, एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, “जिन पार्टियों के खिलाफ हम चुनाव लड़ते हैं, उनसे हाथ मिलाना ठीक नहीं है।

अगर कुछ लोग सिर्फ सत्ता पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने कहा, “जिन लोगों के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, उन्हीं से हाथ मिलाना स्वार्थी कदम है। कुछ लोगों को समझना चाहिए कि सत्ता ही सब कुछ नहीं होती।” अकोट में भाजपा ने 'अकोट विकास मंच' बनाया,

जिसमें एआईएमआईएम के अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा), शिवसेना, राकांपा, शरद पवार की राकांपा (एसपी) और बच्छू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल है। भाजपा ने 35 सदस्यीय परिषद में 11 सीट जीतीं, एआईएमआईएम को दो सीट पर जीत मिली। अन्य पार्टियों के समर्थन से गठबंधन के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

अकोला से भाजपा के सांसद अनुप धोत्रे ने कहा कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा से हाथ मिला लिया। एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा, “हमारा राजनीतिक रुख भाजपा के खिलाफ है। मैंने पार्टी के प्रभारी से तुरंत मुझे स्थिति की जानकारी देने को कहा है।”

भाजपा की माया धुले महापौर चुनी गई हैं, और पार्टी के ही रवि ठाकुर को समूह नेता नियुक्त किया गया है। यह गठबंधन अकोला जिला प्रशासन में बुधवार को पंजीकृत किया गया, ताकि 13 जनवरी को होने वाले उप-महापौर और समिति चुनावों से पहले सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। छह सीट जीतने वाली कांग्रेस, और दो सीट पर जीत हासिल करने वाली वंचित बहुजन आघाड़ी विपक्ष में रहीं।

धोत्रे ने पत्रकारों से कहा, “एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया। हमने एआईएमआईएम के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है।” अकोला से भाजपा के विधायक रंधीर सावकर ने कहा कि अकोट में एआईएमआईएम के पांच पार्षदों में से चार ने "पार्टी की कट्टर व सांप्रदायिक सोच को अस्वीकार करके” अकोट विकास मंच में शामिल होने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा, “चुनाव जीतने वाले एआईएमआईएम के पांचवे सदस्य हमारे संपर्क से बाहर हैं। हमने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन नहीं किया, और भाजपा के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं हुआ है।” जलील ने कहा कि पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा के किसी गठबंधन में शामिल नहीं होगी।

एआईएमआईएम के राज्य अध्यक्ष जलील ने कहा, “ओवैसी अकोट में पार्षदों के निर्णय से नाराज हैं। अगर भाजपा किसी गठबंधन का हिस्सा है, तो हम उसमें शामिल नहीं होंगे।” उन्होंने यह दावा खारिज कर दिया कि एआईएमआईएम पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी है।

जलील ने कहा, “मैंने पार्षदों को स्पष्ट कर दिया था कि हम भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि वे स्थानीय स्तर पर भाजपा के साथ एक सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना चाहते हैं। लेकिन मैंने उन्हें स्पष्ट किया कि विचारधारा को ध्यान में रखते हुए हम भाजपा से हाथ नहीं मिला सकते।”

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